यूरोपीय संघ (ईयू) की शीर्ष राजनयिक और विदेश नीति प्रमुख काजा कालास ने मंगलवार (27 जनवरी 2026) को कहा कि भारत और यूरोप मिलकर एक ऐसा साझेदारी ढांचा बना सकते हैं जो “पूर्वानुमेय और भरोसेमंद” हो। उन्होंने वैश्विक अनिश्चितताओं के लिए अमेरिका, रूस और चीन की नीतियों की आलोचना की और कहा कि इन देशों की कार्रवाइयों से अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में अस्थिरता बढ़ी है।
काजा कालास ने बताया कि भारत-ईयू शिखर सम्मेलन के दौरान यूरोपीय संघ ने भारत से आग्रह किया कि वह यूक्रेन युद्ध को समाप्त कराने के लिए रूस पर “दबाव” डाले। यह शिखर सम्मेलन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा के बीच आयोजित हुआ था।
कालास ने कहा कि यूरोप रूस को अपने अस्तित्व के लिए एक गंभीर खतरे के रूप में देखता है और यूक्रेन में चल रहा युद्ध केवल क्षेत्रीय संघर्ष नहीं, बल्कि यूरोपीय सुरक्षा व्यवस्था के लिए सीधी चुनौती है। उन्होंने यह भी कहा कि यूरोपीय संघ चाहता है कि भारत जैसे प्रभावशाली देश कूटनीतिक स्तर पर सक्रिय भूमिका निभाएं और शांति प्रयासों को मजबूत करें।
और पढ़ें: भारत-ईयू रक्षा समझौता तैयार, गोवा अग्निकांड और हैदराबाद हादसे पर बड़ी कार्रवाई
इसके साथ ही, ईयू की विदेश नीति प्रमुख ने अमेरिका द्वारा लगाए गए शुल्कों और चीन की “दबावपूर्ण” नीतियों पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि व्यापारिक टकराव, आर्थिक दबाव और सैन्य आक्रामकता जैसी नीतियां वैश्विक स्थिरता को कमजोर कर रही हैं।
कालास के अनुसार, भारत और यूरोप के बीच रणनीतिक सहयोग न केवल आर्थिक और व्यापारिक क्षेत्रों में, बल्कि सुरक्षा, तकनीक और वैश्विक शासन के मुद्दों पर भी अहम हो सकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि दोनों पक्ष साझा मूल्यों और नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के समर्थन के आधार पर आगे बढ़ सकते हैं।
और पढ़ें: रूस-यूक्रेन युद्ध: 1,433वें दिन की प्रमुख घटनाओं की सूची