केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने भारतीय इतिहास और सभ्यता की विविधता पर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि भारतीय सभ्यता विभिन्न आस्थाओं और संस्कृतियों का संगम है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि इतिहास के पन्नों को, चाहे उनका रंग या काल कोई भी हो, मिटाया या हटाया नहीं जा सकता।
उन्होंने यह बयान एक विशेष साक्षात्कार के दौरान दिया। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश में कुछ दक्षिणपंथी संगठन भारतीय सभ्यता की पहचान को विशेष रूप से प्राचीन हिंदू परंपराओं तक सीमित करने पर जोर दे रहे हैं, विशेषकर 12वीं शताब्दी के बाद शुरू हुए इस्लामिक शासन काल से पहले की ऐतिहासिक पहचान को प्रमुखता देने की मांग कर रहे हैं।
गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि भारत की असली ताकत उसकी विविधता में निहित है। उन्होंने बताया कि देश में प्राचीन मंदिरों की समृद्ध विरासत और बाद के काल में बने इस्लामिक स्थापत्य कला के उत्कृष्ट नमूने—दोनों ही भारतीय सभ्यता के लिए समान रूप से महत्वपूर्ण हैं।
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उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी ऐतिहासिक चरण को नकारा नहीं जा सकता, क्योंकि हर काल ने भारत की सांस्कृतिक और सामाजिक संरचना को आकार देने में योगदान दिया है।
मंत्री ने कहा कि भारतीय सभ्यता को एक एकीकृत दृष्टि से देखना चाहिए, जिसमें सभी धर्मों, संस्कृतियों और ऐतिहासिक चरणों का सम्मान शामिल हो। उनके अनुसार, यही दृष्टिकोण देश की सांस्कृतिक एकता को मजबूत करता है।
उनकी यह टिप्पणी सांस्कृतिक बहुलता और ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण की बहस को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ले आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे बयान भारत की समावेशी पहचान को और मजबूत करते हैं।
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