आंध्र प्रदेश के तिरुपति शहर में प्रसिद्ध लोक उत्सव गंगम्मा जात्रा का मंगलवार, 5 मई 2026 को धूमधाम के साथ शुभारंभ हुआ। यह नौ दिवसीय पारंपरिक पर्व क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत और आस्था का प्रतीक माना जाता है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग लेते हैं।
लोक मान्यताओं के अनुसार, तिरुपति की स्थानीय देवी गंगम्मा को सात विभिन्न रूपों में पूजा जाता है। इनमें थल्लापाका पेड्डा गंगम्मा, थाथायगुंटा चिन्ना गंगम्मा, मुथ्यालम्मा, नेरेल्लम्मा, मथम्मा, अंकारम्मा और वेशालम्मा शामिल हैं। इन सभी रूपों के अलग-अलग मंदिर हैं, जो पुराने तिरुपति गांव की परिधि में स्थित हैं।
इस उत्सव की सबसे खास परंपरा अंतिम दिनों में देखने को मिलती है, जब पुरुष श्रद्धालु महिलाओं के वेश में सजकर देवी की पूजा करते हैं। यह अनोखी परंपरा लंबे समय से चली आ रही है और इसे देवी को प्रसन्न करने का एक विशेष तरीका माना जाता है।
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हाल के वर्षों में इस परंपरा को तेलुगु फिल्म ‘पुष्पा: द रूल’ के कारण नई पहचान मिली है। फिल्म में दिखाए गए दृश्यों के बाद युवाओं में इस रस्म को लेकर खासा उत्साह देखा जा रहा है। इस बार भी बड़ी संख्या में युवा श्रद्धालु इस परंपरा में भाग लेने के लिए उत्साहित नजर आए।
गंगम्मा जात्रा के दौरान मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, सांस्कृतिक कार्यक्रम और जुलूस आयोजित किए जाते हैं। पूरे शहर में उत्सव का माहौल रहता है और स्थानीय लोग इसे बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं।
यह उत्सव न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि तिरुपति की समृद्ध लोक परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान को भी दर्शाता है, जो हर साल हजारों श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता है।
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