संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण में मंगलवार को लोकसभा में उस समय तीखा राजनीतिक टकराव देखने को मिला, जब स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कार्यवाही की प्रक्रिया पर सवाल उठाए।
गौरव गोगोई ने पूछा कि ऐसी बहस के दौरान सदन की अध्यक्षता करने वाले पैनल का चयन किस तरह किया जाता है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के ‘राविया’ फैसले का हवाला देते हुए कहा कि इस तरह की संवेदनशील बहस के दौरान स्पीकर और अध्यक्षता करने वाले सदस्य दोनों को पूरी तरह निष्पक्ष होना चाहिए।
गोगोई ने यह भी सवाल उठाया कि भारतीय जनता पार्टी के सांसद जगदंबिका पाल को अध्यक्षता करने के लिए कैसे चुना गया। उन्होंने कहा कि सदन को इस बारे में पैनल ऑफ चेयरपर्सन की ओर से कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई।
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गोगोई के बयान के तुरंत बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि स्पीकर का पद कभी खाली नहीं होता। उन्होंने स्पष्ट किया कि चाहे चुनाव का समय हो या सदन भंग हो जाए, स्पीकर का पद लगातार बना रहता है। अमित शाह ने विपक्ष पर नियमों की गलत व्याख्या करने का आरोप भी लगाया।
अमित शाह ने कहा कि स्पीकर बहस के दौरान कुर्सी पर भले न बैठें, लेकिन उनके प्रशासनिक अधिकार समाप्त नहीं होते। उन्होंने कहा कि स्पीकर के पास यह अधिकार रहता है कि वे पैनल से किसी सदस्य को अध्यक्षता के लिए नियुक्त करें।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए जगदंबिका पाल ने भी कहा कि उन्होंने इस मामले में अपना निर्णय पहले ही दे दिया है और संसदीय नियमों के अनुसार उन्हें अध्यक्षता करने का अधिकार है।
इस दौरान बहस और तीखी हो गई जब गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू पर विपक्ष को सबसे ज्यादा बाधित करने का आरोप लगाया, जिस पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जोरदार नोकझोंक देखने को मिली।
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