भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) सितंबर में GISAT-1A उपग्रह लॉन्च करने की तैयारी कर रहा है। यह मिशन कई कारणों से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। खास तौर पर इसकी निगाह इसरो के हालिया लॉन्च रिकॉर्ड को सुधारने पर होगी।
GISAT-1A मिशन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वर्ष 2021 में GISAT-1 उपग्रह को लॉन्च करने का प्रयास विफल हो गया था। उस दौरान रॉकेट के असफल होने के कारण उपग्रह भी नष्ट हो गया था। GISAT-1A इसी मिशन को दोबारा सफल बनाने का दूसरा प्रयास है।
इसके अलावा, वर्ष 2025 और 2026 की शुरुआत में पीएसएलवी के लगातार दो मिशन विफल होने के बाद इसरो ने कुछ समय के लिए लॉन्च गतिविधियों को रोक दिया था। संगठन ने अपने भरोसेमंद माने जाने वाले पीएसएलवी रॉकेट की असामान्य विफलताओं के कारणों की जांच की। इस दौरान कई महत्वपूर्ण उपग्रह लॉन्च की अनुमति मिलने का इंतजार करते रहे।
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केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने 13 जून को कहा था कि सरकार ने इन विफलताओं के कारणों का पता लगा लिया है और आवश्यक सुधार भी किए गए हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा था कि राष्ट्रीय स्तर की विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की जाएगी।
इस फैसले ने सार्वजनिक स्तर पर सवाल खड़े किए। खासतौर पर इसलिए क्योंकि इसरो की तकनीकी विफलताओं की जांच और उसके निष्कर्षों को लेकर पारदर्शिता हमेशा महत्वपूर्ण मानी जाती रही है।
अब सितंबर में GISAT-1A के लॉन्च की तैयारी के साथ इसरो एक बार फिर अंतरिक्ष की ओर कदम बढ़ाने जा रहा है। इस मिशन की सफलता न केवल उपग्रह के लिए बल्कि इसरो के लॉन्च सिस्टम में भरोसा बहाल करने के लिहाज से भी महत्वपूर्ण होगी।
अगर मिशन सफल रहता है तो यह हालिया असफलताओं के बाद इसरो के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि होगी। वहीं, पूरी दुनिया की नजर इस बात पर होगी कि संगठन ने पिछली तकनीकी समस्याओं से क्या सबक लिया और इस बार लॉन्च कितना सफल रहता है।
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