भारत सरकार ने पश्चिम एशिया में तनाव के दौरान प्राकृतिक गैस की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए लगाए गए अधिकांश आपातकालीन प्रतिबंध वापस ले लिए हैं। यह फैसला होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) की आपूर्ति फिर से सामान्य होने और क्षेत्र में युद्धविराम लागू होने के बाद लिया गया है।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने शनिवार, 4 जुलाई 2026 को जारी अधिसूचना में प्राकृतिक गैस (आपूर्ति विनियमन) आदेश, 2026 में संशोधन करते हुए कई महत्वपूर्ण प्रावधानों को हटा दिया। इन प्रावधानों के तहत देश में उत्पादित प्राकृतिक गैस और आयातित एलएनजी की आपूर्ति सरकार द्वारा तय प्राथमिकता वाले उपभोक्ताओं की सूची के अनुसार की जा रही थी।
मंत्रालय ने कहा कि अब क्षेत्रीय हालात में सुधार हुआ है। ईरान और इज़राइल के बीच युद्धविराम लागू है, दोनों पक्षों के बीच बातचीत जारी है और होर्मुज जलडमरूमध्य से समुद्री यातायात भी फिर से सामान्य रूप से संचालित हो रहा है। ऐसे में गैस आपूर्ति पर लगाए गए आपातकालीन प्रतिबंधों को जारी रखने की आवश्यकता नहीं रह गई है।
और पढ़ें: महाराष्ट्र के आदिवासी बच्चों ने मुख्यमंत्री को भेजे पोस्टकार्ड, 18 वर्ष तक मुफ्त शिक्षा की उठाई मांग
सरकार ने पश्चिम एशिया में संघर्ष के दौरान ऊर्जा आपूर्ति में संभावित बाधा को देखते हुए यह अस्थायी व्यवस्था लागू की थी, ताकि बिजली संयंत्रों, उर्वरक उद्योगों और अन्य आवश्यक क्षेत्रों को प्राकृतिक गैस की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि एलएनजी आपूर्ति सामान्य होने से भारत की ऊर्जा सुरक्षा को राहत मिलेगी और उद्योगों को भी नियमित आपूर्ति प्राप्त होगी। इससे गैस आधारित बिजली उत्पादन और उर्वरक निर्माण जैसी गतिविधियों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ने की उम्मीद है।
मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जाएगी। यदि भविष्य में फिर किसी प्रकार का संकट उत्पन्न होता है, तो सरकार आवश्यकतानुसार उचित कदम उठाने के लिए तैयार रहेगी।
और पढ़ें: लैंबॉर्गिनी मालिक ने ऑटो चालक को दी अपनी कार चलाने का मौका, वीडियो वायरल