गुरुग्राम में हर साल बारिश के दौरान होने वाले जलभराव ने एक बार फिर राजनीतिक विवाद को जन्म दे दिया है। मंगलवार, 25 अगस्त को हुई भारी बारिश के बाद शहर के कई हिस्से पानी में डूब गए। इसी बीच भाजपा सांसद राव इंद्रजीत सिंह ने शहर की जल निकासी की समस्या के लिए कांग्रेस शासन के दौरान हुए विकास कार्यों को जिम्मेदार ठहराया। हालांकि, उनके बयान पर सवाल भी उठ रहे हैं, क्योंकि वह पिछले 17 वर्षों से गुरुग्राम का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
राव इंद्रजीत सिंह ने कहा कि गुरुग्राम में वर्षों से जलभराव की समस्या बनी हुई है और कांग्रेस शासन के दौरान हुए विकास कार्यों में पारंपरिक जल निकासी मार्गों को बंद कर दिया गया। उन्होंने कहा कि पुराने नालों के रास्ते भूमिगत सुरंगें बनाकर पानी की निकासी की व्यवस्था करना स्थायी समाधान हो सकता है।
भारी बारिश के कारण बसई रोड और पटौदी रोड समेत कई प्रमुख सड़कों पर करीब दो फीट तक पानी भर गया। दिल्ली-जयपुर राजमार्ग पर यातायात बेहद धीमा हो गया और कई चौराहों तथा रिहायशी इलाकों में भी जलभराव की स्थिति बनी रही। दो स्थानों पर सड़क धंसने की घटनाएं भी सामने आईं, जिससे भारी वाहनों के पहिए फंस गए।
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जलभराव का असर स्कूलों और कार्यालयों पर भी पड़ा। जिला प्रशासन की सलाह के बाद गुरुग्राम के स्कूलों में ऑनलाइन कक्षाएं संचालित की गईं, जबकि कई कंपनियों ने कर्मचारियों को घर से काम करने को कहा।
कांग्रेस का पलटवार
कांग्रेस महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला ने हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि गुरुग्राम का बुनियादी ढांचा पूरी तरह चरमरा गया है। उन्होंने दावा किया कि समस्या के समाधान पर करीब 1,400 करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हुआ।
17 साल का कार्यकाल सवालों के घेरे में
राव इंद्रजीत सिंह 2009 में कांग्रेस के टिकट पर पहली बार गुरुग्राम से लोकसभा सांसद चुने गए थे। 2014 में वह भाजपा में शामिल हुए और इसके बाद भाजपा के टिकट पर तीन बार सीट जीत चुके हैं। इस तरह वह 17 वर्षों से गुरुग्राम का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
हरियाणा में भी भाजपा 2014 से सत्ता में है। ऐसे में कांग्रेस काल को जलभराव के लिए जिम्मेदार ठहराने पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। लगातार हो रहे जलभराव ने गुरुग्राम के तेजी से बढ़ते शहरीकरण, जल निकासी व्यवस्था और सड़क आधारभूत संरचना की कमियों पर फिर सवाल खड़े किए हैं।
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