हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) को ग्रीन हाइड्रोजन क्षेत्र में शोध कार्य को बढ़ावा देने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार विश्वविद्यालय को मजबूत बनाने के लिए हर संभव सहायता प्रदान कर रही है और इसके विकास हेतु प्रतिवर्ष लगभग ₹150 करोड़ की वित्तीय सहायता दी जा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस तरह की पहलें न केवल विश्वविद्यालय की आधारभूत संरचना को मजबूत करेंगी, बल्कि डिजिटल परिवर्तन और शैक्षणिक गुणवत्ता को भी नई दिशा देंगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि ग्रीन हाइड्रोजन जैसे उभरते हुए ऊर्जा क्षेत्र में शोध भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से कहा कि वह नवाचार और अनुसंधान को प्राथमिकता दे, ताकि हिमाचल प्रदेश को स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाया जा सके। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राज्य सरकार शिक्षा और शोध के क्षेत्र में लगातार निवेश कर रही है, जिससे युवाओं को नए अवसर मिल सकें।
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बैठक के दौरान विश्वविद्यालय की प्रगति, शैक्षणिक सुधार और भविष्य की योजनाओं पर भी चर्चा की गई। अधिकारियों ने बताया कि ग्रीन हाइड्रोजन जैसे क्षेत्रों में शोध से न केवल राज्य को तकनीकी लाभ मिलेगा, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी उत्पन्न होंगे।
मुख्यमंत्री ने यह विश्वास जताया कि हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय आने वाले समय में ऊर्जा अनुसंधान का एक प्रमुख केंद्र बन सकता है और राज्य की पहचान को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत करेगा।
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