उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्री बख्तियार सईदोव ने कहा कि उनकी चार दिवसीय भारत यात्रा का प्रमुख उद्देश्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रस्तावित उज्बेकिस्तान यात्रा की तैयारियों को आगे बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि यह दौरा दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने तथा विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
बख्तियार सईदोव 2 अगस्त से 5 अगस्त तक भारत की आधिकारिक यात्रा पर हैं। इस दौरान उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से राष्ट्रपति भवन में शिष्टाचार भेंट की। इसके बाद उन्होंने विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की विस्तृत वार्ता की, जिसमें द्विपक्षीय संबंधों के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई।
बैठक के दौरान सईदोव ने कहा कि उनकी यात्रा दोनों देशों के बीच नियमित संवाद की निरंतरता है। उन्होंने बताया कि लगभग दस दिन पहले उनकी और एस. जयशंकर की टेलीफोन पर विस्तृत बातचीत हुई थी। उसी चर्चा के आधार पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आगामी उज्बेकिस्तान यात्रा की तैयारियों के लिए यह बैठक आयोजित की गई।
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उन्होंने कहा कि भारत और उज्बेकिस्तान ने हमेशा अंतरराष्ट्रीय मंचों और वैश्विक आयोजनों का उपयोग आपसी सहयोग को मजबूत करने के लिए किया है। उनके अनुसार, वर्तमान यात्रा दोनों देशों के संबंधों को नई गति देने और सहयोग के नए अवसर तलाशने का उपयुक्त अवसर है।
बख्तियार सईदोव ने भारत को दक्षिण एशिया में उज्बेकिस्तान का सबसे विश्वसनीय, महत्वपूर्ण रणनीतिक और व्यापारिक साझेदार बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के संबंध पारस्परिक विश्वास, सम्मान और साझा हितों पर आधारित हैं तथा भविष्य में इन्हें और व्यापक बनाया जाएगा।
वार्ता के दौरान दोनों पक्षों ने भारत-उज्बेकिस्तान रणनीतिक साझेदारी की प्रगति की समीक्षा की। ऊर्जा, आधारभूत संरचना, रक्षा, व्यापार, शिक्षा, संस्कृति तथा अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।
बैठक के बाद विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कहा कि उन्होंने अपने मित्र बख्तियार सईदोव के साथ भारत-उज्बेकिस्तान रणनीतिक साझेदारी की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने कहा कि बातचीत में ऊर्जा, अवसंरचना, व्यापार, रक्षा, शिक्षा और संस्कृति जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया।
दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय चुनौतियों, बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करने और साझा हितों से जुड़े मुद्दों पर भी विचार साझा किए। साथ ही भविष्य में उच्चस्तरीय संपर्क बढ़ाने और द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की प्रतिबद्धता दोहराई।
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