हिमाचल प्रदेश विधानसभा ने हिमाचल प्रदेश विधायिका सदस्य भत्ते एवं पेंशन (संशोधन) विधेयक, 2026 पास किया। इस संशोधन के तहत, दल बदल कानून (Anti-Defection Law) के तहत अयोग्य घोषित एमएलए अब पेंशन के पात्र नहीं होंगे। यह कदम मार्च 2024 में स्पीकर कुलदीप सिंह पथानिया द्वारा छह विधायकों को अयोग्य घोषित करने के बाद आया।
नए प्रावधानों के तहत पहले कार्यकाल के एमएलए चैतन्य शर्मा (गगरेट) और देवेन्द्र भुट्टो (कुटलेहर) पेंशन के हकदार नहीं रहेंगे। वहीं, रवि ठाकुर और राजिंदर राणा, जिन्होंने विधानसभा उपचुनाव में हार का सामना किया, 14वीं विधानसभा के कार्यकाल की पेंशन पाने के योग्य नहीं होंगे। दूसरी ओर, सुधीर शर्मा और इंदर दत्त लखनपाल, जो पुनः निर्वाचित हुए हैं, इस नए कानून से प्रभावित नहीं होंगे।
छह कांग्रेस विधायकों को फरवरी 2024 में राज्यसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी हर्ष महाजन के पक्ष में क्रॉस वोटिंग करने के कारण अयोग्य घोषित किया गया था। इसके अलावा, उन्होंने बजट और कट मोशन पर कांग्रेस सरकार का समर्थन नहीं किया, जिससे उन्हें दल बदल कानून के तहत अयोग्य घोषित किया गया।
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मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुखू ने विधेयक पेश करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य केवल कांग्रेस का लाभ नहीं, बल्कि जनता के मत का सम्मान करने वाले प्रतिनिधियों को जिम्मेदार बनाना है। उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि 2024 में सरकार को अस्थिर करने के प्रयास किए गए।
भाजपा विधायक रंधीर शर्मा ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध बताया और कहा कि यह कानून कानूनी परीक्षा में टिक नहीं पाएगा। विपक्ष नेता जयराम ठाकुर ने कहा कि ऐतिहासिक रूप से पूर्व विधायकों को चुनाव हारने के बावजूद पेंशन मिलती रही है।
संसदीय कार्य मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि विधेयक राजनीतिक दल बदल रोकने के लिए लाया गया है और इसमें कोई दुर्भावना नहीं है। राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा कि यह विधेयक विस्तृत विचार-विमर्श के बाद प्रस्तुत किया गया।
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