भारतीय वायुसेना को अपनी लड़ाकू स्क्वाड्रनों की संख्या में और कमी रोकने के लिए अगले कुछ वर्षों तक हर साल 36 से 40 नए लड़ाकू विमानों की जरूरत होगी। वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने वायुसेना दिवस से पहले नई दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह जानकारी दी।
वायुसेना की स्वीकृत क्षमता 42 लड़ाकू स्क्वाड्रनों की है, जबकि मौजूदा संख्या 29 रह गई है। ऐसे में नए विमानों की समय पर आपूर्ति को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एपी सिंह ने उम्मीद जताई कि स्वदेशी तेजस एमके-1A की आपूर्ति और फ्रांस से प्रस्तावित राफेल विमानों की खरीद से स्थिति में सुधार होगा।
भारत ने 114 राफेल विमानों की खरीद की प्रक्रिया आगे बढ़ाई है। प्रस्तावित बहुउद्देश्यीय लड़ाकू विमान कार्यक्रम के तहत इस सौदे को वित्त वर्ष के अंत तक अंतिम रूप दिए जाने की उम्मीद जताई गई है। हालांकि, एयर चीफ मार्शल ने इसे दोतरफा प्रक्रिया बताते हुए कहा कि अंतिम निर्णय प्रक्रिया पूरी होने पर ही होगा।
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तेजस एमके-1A की देरी पर चिंता
एपी सिंह ने तेजस एमके-1A की आपूर्ति में देरी पर भी चिंता जताई। फरवरी 2021 में रक्षा मंत्रालय ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के साथ 83 विमानों के लिए करीब 48,000 करोड़ रुपये का समझौता किया था। इन विमानों की डिलीवरी तय समय से पीछे चल रही है। बाद में 97 अतिरिक्त तेजस एमके-1A विमानों की खरीद का समझौता भी किया गया।
एसयू-57 पर अभी फैसला नहीं
वायुसेना प्रमुख ने कहा कि रूस ने पांचवीं पीढ़ी के एसयू-57 लड़ाकू विमान की पेशकश की है, लेकिन भारत ने अभी इस पर कोई निर्णय नहीं लिया है। उन्होंने कहा कि यदि एएमसीए कार्यक्रम में देरी होती है तो अन्य विकल्पों पर विचार करना पड़ सकता है।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद थिएटर कमांड व्यवस्था पर चर्चा की दिशा में बदलाव आया है। एपी सिंह ने स्पष्ट किया कि वायुसेना थिएटर कमांड के खिलाफ नहीं है और वह इससे संबंधित चर्चाओं में लगातार शामिल रही है।
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