भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने शुक्रवार को दक्षिण-पश्चिम मानसून को लेकर अपना दूसरे चरण का दीर्घकालिक पूर्वानुमान जारी किया। विभाग ने अनुमान जताया है कि जून महीने में देश के कई महत्वपूर्ण हिस्सों में सामान्य से कम बारिश हो सकती है। इसके साथ ही कई राज्यों में सामान्य से अधिक हीटवेव यानी लू चलने की संभावना भी व्यक्त की गई है।
आईएमडी के अनुसार, मानसून के शुरुआती चरण में बारिश का वितरण असमान रह सकता है। कुछ क्षेत्रों में सामान्य से कम वर्षा होने के कारण कृषि गतिविधियों और जल भंडारण पर असर पड़ने की आशंका है। मौसम विभाग ने किसानों और संबंधित एजेंसियों को मौसम की बदलती परिस्थितियों पर नजर बनाए रखने की सलाह दी है।
विभाग ने यह भी चेतावनी दी है कि जून के दौरान उत्तर-पश्चिम, मध्य और पूर्वी भारत के कई हिस्सों में हीटवेव की स्थिति बन सकती है। लगातार बढ़ते तापमान के कारण लोगों को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और बीमार व्यक्तियों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
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विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन और वैश्विक तापमान में बढ़ोतरी का असर मानसून के पैटर्न पर भी दिखाई दे रहा है। पिछले कुछ वर्षों में मौसम की अनिश्चितता और अत्यधिक गर्मी की घटनाओं में लगातार वृद्धि देखी गई है।
आईएमडी ने राज्य सरकारों और आपदा प्रबंधन एजेंसियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। लोगों से अपील की गई है कि वे अत्यधिक गर्मी के दौरान दोपहर में बाहर निकलने से बचें, पर्याप्त पानी पिएं और मौसम विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें।
मानसून भारत की कृषि और अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में जून के मौसम को लेकर जारी यह पूर्वानुमान किसानों और आम लोगों दोनों के लिए चिंता बढ़ाने वाला माना जा रहा है।
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