अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने भारत की आर्थिक वृद्धि को लेकर सकारात्मक संकेत दिए हैं। आईएमएफ ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए भारत की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर के अपने अनुमान को बढ़ाकर 7.3 प्रतिशत कर दिया है, जो पहले 6.6 प्रतिशत आंकी गई थी। यह जानकारी आईएमएफ की जनवरी 2026 की ‘वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक’ (विश्व आर्थिक परिदृश्य) रिपोर्ट के अद्यतन संस्करण में दी गई है, जिसे सोमवार (19 जनवरी 2026) को जारी किया गया।
आईएमएफ के अनुसार, भारत की वृद्धि दर में यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन और चौथी तिमाही में मजबूत आर्थिक गति को दर्शाती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि घरेलू मांग, निवेश गतिविधियों और औद्योगिक उत्पादन में निरंतर मजबूती ने भारत की आर्थिक रफ्तार को सहारा दिया है।
वैश्विक परिदृश्य की बात करें तो आईएमएफ ने अनुमान लगाया है कि वर्ष 2026 में वैश्विक आर्थिक वृद्धि दर 3.3 प्रतिशत पर ‘लचीली’ बनी रहेगी, जबकि वर्ष 2027 में यह मामूली रूप से घटकर 3.2 प्रतिशत रह सकती है। यह दरें वर्ष 2025 के लिए अनुमानित 3.3 प्रतिशत के लगभग समान हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, वैश्विक अर्थव्यवस्था भू-राजनीतिक तनावों, महंगाई और वित्तीय सख्ती जैसी चुनौतियों के बावजूद अपेक्षाकृत स्थिर बनी हुई है।
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आईएमएफ ने यह भी संकेत दिया कि उभरती अर्थव्यवस्थाओं, विशेषकर भारत, ने वैश्विक विकास को गति देने में अहम भूमिका निभाई है। भारत की मजबूत आर्थिक बुनियाद, संरचनात्मक सुधार, डिजिटल अर्थव्यवस्था का विस्तार और सार्वजनिक पूंजीगत व्यय में वृद्धि को विकास के प्रमुख कारक बताया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आईएमएफ द्वारा वृद्धि दर में किया गया यह संशोधन भारत की आर्थिक मजबूती और निवेशकों के बढ़ते भरोसे को दर्शाता है। आने वाले समय में यदि वैश्विक परिस्थितियां अनुकूल रहीं, तो भारत विश्व अर्थव्यवस्था में एक प्रमुख विकास इंजन के रूप में उभरता रहेगा।
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