सोमवार 9 मार्च 2026 को राज्यसभा में पर्यावरण मंत्रालय के कामकाज पर हुई चर्चा के दौरान खासकर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में बढ़ते वायु प्रदूषण का मुद्दा प्रमुख रूप से उठा। कई सांसदों ने प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए सख्त नियम लागू करने और मंत्रालय के “वैचारिक पुनर्गठन” की मांग की ताकि जलवायु परिवर्तन जैसी उभरती चुनौतियों से बेहतर तरीके से निपटा जा सके।
चर्चा की शुरुआत भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद घनश्याम तिवारी ने की। उन्होंने कहा कि नरेन्द्र मोदी सरकार ने पर्यावरण संरक्षण के लिए कई महत्वपूर्ण पहल की हैं। उन्होंने बताया कि सरकार ने प्रदूषण नियंत्रण, वन संरक्षण को मजबूत करने और देश में बाघों की संख्या बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए हैं।
घनश्याम तिवारी ने यह भी कहा कि लगभग हर क्षेत्र में कचरे की मात्रा लगातार बढ़ रही है और इसे प्रभावी प्रबंधन के जरिए नियंत्रित करना जरूरी है। उनके अनुसार, ठोस कचरा प्रबंधन और पर्यावरणीय नीतियों के बेहतर क्रियान्वयन से प्रदूषण की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
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इस दौरान कुछ सांसदों ने खासकर दिल्ली में वायु प्रदूषण की गंभीर स्थिति का मुद्दा उठाया। स्वाति मालीवाल ने दिल्ली के प्रदूषण संकट को “लगातार जारी अपराध” बताया और कहा कि लोगों के स्वास्थ्य पर इसका गंभीर असर पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से तत्काल और सख्त कदम उठाने की मांग की।
सांसदों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन और बढ़ते प्रदूषण की चुनौतियों से निपटने के लिए नीति स्तर पर बड़े बदलाव की आवश्यकता है। उन्होंने पर्यावरण मंत्रालय को अधिक सक्षम बनाने और सख्त कानूनों के प्रभावी पालन पर जोर दिया।
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