भारत के निजी क्षेत्र की कारोबारी गतिविधियों में अगस्त के दौरान मामूली तेजी दर्ज की गई। एचएसबीसी फ्लैश इंडिया कंपोजिट परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स यानी पीएमआई आउटपुट इंडेक्स जुलाई के 54.3 से बढ़कर अगस्त में 54.6 पर पहुंच गया। हालांकि सुधार सीमित रहा और यह आंकड़ा मार्च 2022 के बाद दूसरा सबसे कमजोर स्तर बना रहा।
जुलाई में कंपोजिट पीएमआई 52 महीनों के निचले स्तर पर पहुंच गया था। अगस्त के आंकड़ों में मामूली सुधार से निजी क्षेत्र की गतिविधियों को कुछ सहारा मिला, लेकिन समग्र वृद्धि की रफ्तार अभी भी कमजोर बनी हुई है। कंपोजिट इंडेक्स देश के विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों के संयुक्त उत्पादन में महीने-दर-महीने होने वाले बदलाव को दर्शाता है।
रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त में भारतीय कंपनियों को नए ऑर्डरों में कुछ बेहतर वृद्धि देखने को मिली। हालांकि चुनौतीपूर्ण बाजार परिस्थितियों, बढ़ती प्रतिस्पर्धा और ग्राहकों की कमजोर मांग ने विस्तार की गति को सीमित रखा।
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निजी क्षेत्र की गतिविधियों में सुधार का प्रमुख कारण सेवा क्षेत्र रहा। एचएसबीसी फ्लैश इंडिया सर्विसेज पीएमआई बिजनेस एक्टिविटी इंडेक्स जुलाई के 53.3 से बढ़कर अगस्त में 54.5 हो गया। जुलाई में 53 महीनों की सबसे कमजोर वृद्धि के बाद सेवा क्षेत्र की कारोबारी गतिविधियों और नए काम में अगस्त के दौरान सुधार दर्ज किया गया।
दूसरी ओर, विनिर्माण क्षेत्र की गति लगातार कमजोर होती रही। एचएसबीसी फ्लैश इंडिया मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई जुलाई के 53.5 से घटकर अगस्त में 52.9 रह गया। यह लगातार तीसरा महीना है, जब विनिर्माण पीएमआई में गिरावट दर्ज की गई।
विनिर्माण उत्पादन सूचकांक भी जुलाई के 56.4 से घटकर 54.9 पर आ गया। रिपोर्ट के मुताबिक, उत्पादन और नए ऑर्डरों में वृद्धि पांच वर्षों के सबसे कमजोर स्तर पर रही। इनपुट खरीद की वृद्धि भी पांच वर्षों से अधिक समय के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई।
अगस्त के आंकड़ों से भारत के निजी क्षेत्र की दो प्रमुख शाखाओं में अलग-अलग रुझान सामने आए। जहां सेवा क्षेत्र ने कमजोर जुलाई के बाद कुछ गति पकड़ी, वहीं विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि और धीमी पड़ गई।
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