ईरान-अमेरिका संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर बने संकट के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। लाइबेरिया के झंडे वाला तेल टैंकर शेनलोंग सूएजमैक्स खतरनाक होर्मुज जलडमरूमध्य को पार करते हुए सुरक्षित रूप से मुंबई बंदरगाह पहुंच गया। यह युद्ध शुरू होने के बाद भारत पहुंचने वाला पहला कच्चे तेल का टैंकर माना जा रहा है।
यह जहाज 1 मार्च को सऊदी अरब के रस तनूरा बंदरगाह से करीब 1,35,335 मीट्रिक टन कच्चा तेल लेकर रवाना हुआ था। 8 मार्च को इसने होर्मुज जलडमरूमध्य पार किया और सुरक्षा कारणों से कुछ समय के लिए जहाज की ट्रैकिंग प्रणाली बंद कर दी गई थी। बाद में 9 मार्च को यह फिर से ट्रैकिंग सिस्टम पर दिखाई दिया और भारत की ओर बढ़ता हुआ देखा गया।
इस टैंकर का संचालन ग्रीस के एथेंस स्थित डायनाकोम टैंकर मैनेजमेंट कर रही है, जबकि इसका स्वामित्व शेनलोंग शिपिंग लिमिटेड के पास है। जहाज में कुल 29 सदस्यीय चालक दल था, जिसमें भारतीय, पाकिस्तानी और फिलीपींस के नाविक शामिल थे। जहाज के कप्तान सुखशांत सिंह संधू हैं।
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मुंबई पोर्ट अथॉरिटी के उप संरक्षक प्रवीण सिंह के अनुसार टैंकर बुधवार दोपहर करीब 1 बजे मुंबई पहुंचा और शाम 6 बजे जवाहर द्वीप टर्मिनल पर लंगर डाला। यहां से तेल को माहुल रिफाइनरी तक पहुंचाया जाएगा और इसे खाली करने में लगभग 36 घंटे लगेंगे।
हालांकि इस सफलता के बावजूद चिंता बनी हुई है। नौवहन महानिदेशालय के अनुसार अभी भी करीब 28 भारतीय जहाज युद्ध प्रभावित क्षेत्र के आसपास फंसे हुए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से आता है, इसलिए होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव बढ़ने से देश की ऊर्जा सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता है।
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