भारत का लिफ्ट और एस्केलेटर उद्योग, जो दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते वर्टिकल मोबिलिटी बाजारों में शामिल है, अब एक समान राष्ट्रीय कानून की मांग कर रहा है। उद्योग जगत ने ‘वन नेशन, वन लिफ्ट लॉ’ (ONOL) लागू करने का प्रस्ताव रखा है, जिससे सुरक्षा मानकों को मजबूत किया जा सके, नियमों को सरल बनाया जा सके और इस क्षेत्र में टिकाऊ विकास को बढ़ावा मिल सके।
उद्योग अधिकारियों के अनुसार, देश में तेजी से हो रहे शहरीकरण और ऊंची इमारतों के निर्माण के कारण हर साल लगभग एक लाख लिफ्टों की बिक्री हो रही है। ऐसे में अलग-अलग राज्यों के नियमों और मानकों के कारण कंपनियों, बिल्डरों और उपभोक्ताओं को कई तरह की जटिलताओं का सामना करना पड़ता है। फिलहाल लिफ्टों से जुड़े नियम राज्य स्तर पर बनाए जाते हैं, जिससे सुरक्षा मानकों में असमानता और अनुपालन की समस्याएं उत्पन्न होती हैं।
उद्योग का मानना है कि यदि पूरे देश में लिफ्टों और एस्केलेटरों के लिए एक समान कानून लागू किया जाता है, तो इससे यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी और दुर्घटनाओं की आशंका कम होगी। इसके साथ ही निरीक्षण, प्रमाणन और रखरखाव से जुड़ी प्रक्रियाएं भी अधिक पारदर्शी और प्रभावी बन सकेंगी।
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लिफ्ट उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि ‘वन नेशन, वन लिफ्ट कानून’ से निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा, क्योंकि कंपनियों को एक समान नियमों के तहत काम करने में आसानी होगी। इससे निर्माण क्षेत्र को गति मिलेगी और स्मार्ट शहरों तथा आधुनिक बुनियादी ढांचे के विकास में मदद मिलेगी।
उद्योग ने यह भी जोर दिया है कि नई तकनीकों, ऊर्जा दक्षता और पर्यावरण के अनुकूल समाधानों को बढ़ावा देने के लिए एक राष्ट्रीय ढांचा जरूरी है। उनका मानना है कि केंद्र सरकार द्वारा ऐसा कानून बनाए जाने से भारत वैश्विक स्तर पर लिफ्ट और एस्केलेटर निर्माण व सुरक्षा मानकों में अग्रणी भूमिका निभा सकता है।
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