भारत शुक्रवार को परिवहन क्षेत्र में एक नई उपलब्धि हासिल करने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज हरियाणा के जींद रेलवे स्टेशन से देश की पहली हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन को हरी झंडी दिखाएंगे। यह ट्रेन जींद से सोनीपत के बीच संचालित होगी। इसके साथ ही भारत उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल हो जाएगा, जहां हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेनें परिचालन में हैं।
हाइड्रोजन ट्रेन को पर्यावरण के अनुकूल परिवहन व्यवस्था की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। पारंपरिक इलेक्ट्रिक ट्रेनों के विपरीत, जो ऊपर लगी बिजली की लाइनों से ऊर्जा प्राप्त करती हैं, यह हाइड्रोजन फ्यूल सेल ट्रेनसेट अपने अंदर ही बिजली उत्पन्न करती है।
यह प्रक्रिया हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के बीच रासायनिक प्रतिक्रिया के माध्यम से होती है। इस दौरान बिजली के साथ केवल जलवाष्प और गर्मी उप-उत्पाद के रूप में निकलते हैं, जिससे यह ट्रेन प्रदूषण कम करने में मदद करेगी।
और पढ़ें: एजेंटिक एआई के दौर में ज्ञान आधारित काम का बदलता स्वरूप, पीटर ड्रकर की भविष्यवाणी फिर चर्चा में
हाइड्रोजन ट्रेन में सुरक्षा व्यवस्था कैसी होगी?
इस ट्रेन में हाइड्रोजन रिसाव, अत्यधिक गर्मी, आग की लपटों और धुएं का पता लगाने के लिए कई स्तरों वाली आधुनिक सुरक्षा प्रणाली लगाई गई है। सेंसर आधारित यह तकनीक किसी भी असामान्य स्थिति का तुरंत पता लगाने में सक्षम होगी, जिससे यात्रियों और संचालन दल की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
हाइड्रोजन एक अत्यधिक ज्वलनशील गैस है, इसलिए इसके सुरक्षित भंडारण और उपयोग के लिए विशेष तकनीकी उपाय किए गए हैं। ट्रेन में लगाए गए सुरक्षा उपकरण लगातार निगरानी करेंगे और किसी खतरे की स्थिति में चेतावनी प्रणाली को सक्रिय करेंगे।
रेलवे के अनुसार, हाइड्रोजन आधारित ट्रेनें भविष्य में उन क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण विकल्प बन सकती हैं जहां रेलवे लाइनों का पूर्ण विद्युतीकरण कठिन या महंगा है। यह पहल भारत के स्वच्छ ऊर्जा और हरित परिवहन के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में मदद करेगी।
हाइड्रोजन ट्रेन परियोजना को भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण और कार्बन उत्सर्जन कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
और पढ़ें: अनुराग कुमार बने दिल्ली पुलिस के नए आयुक्त, सेवानिवृत्ति से पहले सतीश गोलछा की हुई विदाई