तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोगन ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में एक बार फिर जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाया। उनके बयान पर भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट किया कि यह मामला भारत की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता से जुड़ा है और इस पर किसी बाहरी पक्ष का कोई अधिकार क्षेत्र नहीं है।
22 सितंबर को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए एर्दोगन ने कहा था कि दक्षिण एशिया में कश्मीर समेत सभी विवादों का समाधान संयुक्त राष्ट्र चार्टर और संबंधित प्रस्तावों के दायरे में बातचीत के जरिए किया जाना चाहिए। कश्मीर पर एर्दोगन की यह टिप्पणी पहली बार नहीं है। वह इससे पहले भी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस मुद्दे का उल्लेख कर चुके हैं।
भारत के विदेश मंत्रालय ने 29 सितंबर को एर्दोगन की टिप्पणी को खारिज करते हुए इसे अवांछित संदर्भ बताया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत जम्मू-कश्मीर के संदर्भ में की गई टिप्पणी को स्वीकार नहीं करता। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह भारत की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता से संबंधित विषय है तथा इस मामले में किसी बाहरी पक्ष का कोई अधिकार क्षेत्र नहीं है।
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भारत लंबे समय से जम्मू-कश्मीर से जुड़े मामलों में किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता को स्वीकार नहीं करने की नीति दोहराता रहा है। नई दिल्ली का कहना है कि ऐसे विषयों पर उसका रुख स्पष्ट है।
एर्दोगन के हालिया बयान के बाद एक बार फिर भारत और तुर्की के बीच कश्मीर को लेकर कूटनीतिक मतभेद सामने आए हैं। वहीं, तुर्की लगातार बातचीत और संयुक्त राष्ट्र के प्रासंगिक प्रस्तावों के संदर्भ में इस मुद्दे को उठाता रहा है।
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