केंद्र सरकार ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य में फंसे 15 भारतीय जहाजों को सुरक्षित वापस लाने के लिए प्रयास तेज कर दिए हैं। पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय और विदेश मंत्रालय इस पूरे अभियान में आपसी समन्वय के साथ काम कर रहे हैं।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, ये सभी जहाज मौजूदा भू-राजनीतिक तनाव और समुद्री सुरक्षा चिंताओं के कारण होर्मुज़ जलडमरूमध्य क्षेत्र में फंस गए हैं। यह इलाका दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है।
मंत्रालयों ने बताया कि भारतीय जहाजों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और उन्हें सुरक्षित निकालने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। इसके लिए क्षेत्र में मौजूद भारतीय मिशनों, नौवहन एजेंसियों और अंतरराष्ट्रीय भागीदारों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा गया है।
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विदेश मंत्रालय स्थिति पर करीब से नजर रखे हुए है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त सहायता देने के लिए तैयार है। अधिकारियों का कहना है कि जहाजों के चालक दल की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं।
इस बीच, वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव और संभावित सैन्य गतिविधियों के कारण होर्मुज़ जलडमरूमध्य में आवाजाही प्रभावित हुई है। कई देशों ने अपने जहाजों को सावधानी बरतने की सलाह दी है और कुछ ने वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल शुरू कर दिया है।
भारत सरकार ने भरोसा दिलाया है कि वह अपने नागरिकों और जहाजों की सुरक्षा के लिए हर संभव प्रयास करेगी। संबंधित एजेंसियां स्थिति सामान्य होते ही जहाजों को सुरक्षित रूप से वापस लाने की योजना पर काम कर रही हैं।
यह घटनाक्रम अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर भी असर डाल सकता है, इसलिए भारत इस मुद्दे पर सतर्कता और सक्रियता के साथ काम कर रहा है।
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