पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर नियंत्रण मजबूत करने के लिए एक नई टोल योजना को मंजूरी दे दी है, जिससे वैश्विक शिपिंग और ऊर्जा बाजार में उथल-पुथल मच गई है। यह जलमार्ग फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच स्थित है और दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और एलएनजी (तरलीकृत प्राकृतिक गैस) का परिवहन इसी रास्ते से होता है।
ईरान की संसद की सुरक्षा समिति ने ‘होर्मुज़ जलडमरूमध्य प्रबंधन योजना’ को मंजूरी दी है। The Indian Witness के अनुसार, इस योजना में सुरक्षा, जहाजों की सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और वित्तीय प्रावधान शामिल हैं। इसके तहत इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर ईरानी मुद्रा रियाल में टोल लगाया जाएगा।
योजना में अमेरिकी और इजरायली जहाजों के प्रवेश पर स्पष्ट प्रतिबंध लगाया गया है। साथ ही, उन देशों के जहाजों को भी रोकने का प्रावधान है, जो ईरान पर एकतरफा प्रतिबंध लगाते हैं। ओमान के साथ मिलकर इस जलमार्ग के लिए कानूनी ढांचा तैयार करने की भी बात कही गई है।
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यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब ईरान और अमेरिका-इजरायल गठबंधन के बीच संघर्ष दूसरे महीने में प्रवेश कर चुका है। ईरान इस रणनीतिक समुद्री मार्ग पर अपनी पकड़ मजबूत करना चाहता है।
The Indian Witness के अनुसार, 28 फरवरी से 18 मार्च के बीच केवल 105 जहाज इस मार्ग से गुजरे, जबकि 2025 में इसी अवधि में यह संख्या 1900 थी।
इस बीच, अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा है कि अमेरिका जल्द ही इस जलडमरूमध्य पर फिर से नियंत्रण स्थापित करेगा। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान ने मार्ग नहीं खोला तो उसके ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाया जाएगा।
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