ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की ओर से प्रतिबंधों का दायरा बढ़ाने की धमकी को खारिज करते हुए जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है। ईरान का कहना है कि अमेरिका की आर्थिक दबाव बनाने की कोशिश उसके प्रमुख व्यापारिक साझेदारों के साथ संबंधों को खत्म नहीं कर सकती। साथ ही, तेहरान ने संकेत दिया है कि जरूरत पड़ने पर वह खाड़ी क्षेत्र में जवाबी कदम उठाते हुए तेल निर्यात को और प्रभावित कर सकता है।
ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकर ग़ालिबाफ ने अमेरिका के नए दबाव अभियान को खारिज किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका के पास ईरान के दूसरे देशों के साथ आर्थिक संबंधों को और सीमित करने के लिए पर्याप्त आर्थिक ताकत नहीं है।
अमेरिकी प्रशासन ने ईरान की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ाने के लिए नए कदमों की घोषणा की है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने चेतावनी दी कि ईरान के साथ व्यापार जारी रखने वाले देशों पर ऐसे प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं, जिससे उन्हें डॉलर आधारित वैश्विक वित्तीय व्यवस्था से बाहर किया जा सकता है।
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हालांकि, बेसेंट ने तत्काल सबसे कड़े प्रतिबंध लागू नहीं किए। उन्होंने यह भी स्पष्ट नहीं किया कि किन देशों को निशाना बनाया जाएगा और कार्रवाई कब शुरू होगी।
अमेरिकी वित्त विभाग ने ईरान से जुड़े 60 व्यक्तियों, संस्थाओं और जहाजों पर अलग से प्रतिबंध लगाए हैं। हालांकि, ईरान के तेल कारोबार में मदद करने वाली संदिग्ध चीनी वित्तीय संस्थाओं को इन प्रतिबंधों में शामिल नहीं किया गया। चीन ईरान का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार और उसके तेल का प्रमुख खरीदार है।
ईरान की कड़ी प्रतिक्रिया
ग़ालिबाफ ने कहा कि ईरान के व्यापारिक साझेदार पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि वे अमेरिकी दबाव के सामने नहीं झुकेंगे। उन्होंने कहा कि अमेरिका के पास ईरान के संबंधों को और सीमित करने की आर्थिक स्थिति नहीं है।
ईरान के अर्थव्यवस्था मंत्री अली मदनीज़ादेह ने भी कहा कि उनका देश नए प्रतिबंधों से निपटने के लिए तैयार है। उन्होंने अमेरिका और उसके सहयोगियों पर “आर्थिक आतंकवादी हमला” करने की कोशिश का आरोप लगाया और कहा कि ईरान के पास जवाब देने के लिए अपने आर्थिक साधन मौजूद हैं।
मदनीज़ादेह ने दावा किया कि चीन और रूस ने अमेरिकी नए कदमों को स्वीकार नहीं किया है और दूसरे देश भी वॉशिंगटन की मांगों का विरोध कर सकते हैं।
ईरान पहले ही चेतावनी दे चुका है कि अमेरिकी दबाव बढ़ने पर वह सैन्य जवाब देने के साथ-साथ खाड़ी क्षेत्र से तेल निर्यात को और कम कर सकता है। ऐसे में नए प्रतिबंधों से अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ने और वैश्विक तेल बाजार पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।
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