भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष वी. नारायणन ने शुक्रवार को जीएसएलवी-एफ17 मिशन की सफलता को भारत के लिए बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि उन्नत पृथ्वी अवलोकन उपग्रह ईओएस-05 को निर्धारित और आवश्यक कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया गया है और उपग्रह पूरी तरह स्वस्थ है।
आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में वी. नारायणन ने बताया कि जीएसएलवी-एफ17 मिशन भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण था। इस मिशन के जरिए पहली बार पृथ्वी अवलोकन के लिए किसी उपग्रह को भू-समकालिक कक्षा में स्थापित किया गया है। इससे भारत और आसपास के क्षेत्रों की लगातार निगरानी में मदद मिलेगी।
उन्होंने बताया कि ईओएस-05 का निर्धारित कार्यकाल सात वर्ष है, लेकिन उन्हें भरोसा है कि यह उपग्रह करीब नौ वर्ष तक काम कर सकता है। करीब 36 हजार किलोमीटर ऊंचाई वाले भू-मंच पर स्थापित किया गया यह भारत के पृथ्वी अवलोकन के लिए इस्तेमाल होने वाला महत्वपूर्ण उपग्रह है। साथ ही, यह जीएसएलवी रॉकेट द्वारा अब तक प्रक्षेपित सबसे भारी उपग्रह भी है। यह चालू वित्त वर्ष में इसरो का दूसरा सफल मिशन है।
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गगनयान मिशन पर तेजी से काम
इसरो प्रमुख ने बताया कि भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन गगनयान की तैयारियां पूरी गति से चल रही हैं। उन्होंने कहा कि इस कैलेंडर वर्ष में पहले मानवरहित गगनयान मिशन को पूरा करने के लिए व्यवस्थित और व्यापक स्तर पर काम किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि गगनयान बेहद जटिल तकनीकी मिशन है और अब तक करीब 8,000 परीक्षण पूरे किए जा चुके हैं। मानव सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए इसरो ने पहले तीन मानवरहित मिशन संचालित करने की योजना बनाई है। इसके बाद मानवयुक्त मिशन किया जाएगा।
वी. नारायणन ने कहा कि इस वित्त वर्ष में इसरो छह और प्रक्षेपण करने की तैयारी कर रहा है। वहीं, ईओएस-05 कृषि और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों के लिए वास्तविक समय की तस्वीरें उपलब्ध कराकर देश के लिए ‘अंतरिक्ष में आंख’ की भूमिका निभाएगा।
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