भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से टेलीफोन पर बातचीत कर खाड़ी क्षेत्र में भारतीय चालक दल वाले व्यापारिक जहाजों पर हुए हमलों के खिलाफ भारत का कड़ा विरोध दर्ज कराया। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है और इन हमलों को लेकर दोनों देशों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।
डॉ. जयशंकर ने कहा कि उन्होंने अमेरिकी नौसेना द्वारा किए गए हमलों पर भारत की गंभीर आपत्ति दर्ज कराई है। उन्होंने कहा कि वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाना और निर्दोष नाविकों की जान लेना किसी भी स्थिति में उचित नहीं ठहराया जा सकता।
पहली घटना 8 जून को हुई, जब पलाऊ ध्वज वाले तेल टैंकर एमटी मेरिवेक्स पर ओमान तट के निकट हमला हुआ। इस जहाज पर 24 भारतीय चालक दल के सदस्य सवार थे, जिन्हें बाद में ओमान द्वारा सुरक्षित निकाला गया।
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दूसरी घटना 10 जून को सामने आई, जब पलाऊ ध्वज वाले एक अन्य टैंकर एमटी सेत्तेबेल्लो को ओमान के पास निशाना बनाया गया। जहाज पर मौजूद 24 चालक दल के सदस्यों में से तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई।
इसके बाद 11 जून को गिनी-बिसाऊ ध्वज वाले टैंकर एमटी जलवीर पर हमला हुआ। इस जहाज पर 20 भारतीय नाविक सवार थे, जिन्हें बाद में सुरक्षित निकाल लिया गया।
भारत ने इन घटनाओं के विरोध में अमेरिकी उप मिशन प्रमुख जेसन मीक्स को तलब किया। हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य के पास भारतीय जहाजों पर हुए हमलों के लिए ईरान जिम्मेदार है। दूसरी ओर ईरान ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए कहा कि अमेरिका अपनी जिम्मेदारी से ध्यान हटाने का प्रयास कर रहा है।
भारत वैश्विक समुद्री व्यापार उद्योग में नाविक उपलब्ध कराने वाले प्रमुख देशों में शामिल है। वर्ष 2025 में भारत के लगभग 3.2 लाख सक्रिय नाविक अंतरराष्ट्रीय समुद्री सेवाओं में कार्यरत थे।
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