एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) ने देश के मुख्यमंत्रियों की संपत्ति को लेकर एक नई रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट में 28 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों की घोषित संपत्ति का विश्लेषण किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला देश के सबसे कम संपत्ति वाले मुख्यमंत्री हैं।
ADR और नेशनल इलेक्शन वॉच द्वारा चुनावी हलफनामों के आधार पर किए गए विश्लेषण में सामने आया है कि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की कुल घोषित संपत्ति 55.24 लाख रुपये है। वहीं, पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी 85.87 लाख रुपये की घोषित संपत्ति के साथ सबसे कम संपत्ति वाले मुख्यमंत्रियों की सूची में दूसरे स्थान पर हैं।
शुभेंदु अधिकारी की कुल संपत्ति में 24.57 लाख रुपये की चल संपत्ति और 61.30 लाख रुपये की अचल संपत्ति शामिल है। इसके बाद राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा का नाम आता है, जिनकी घोषित संपत्ति 1.03 करोड़ रुपये से अधिक है।
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देश के सबसे अमीर मुख्यमंत्री कौन हैं?
ADR की रिपोर्ट के मुताबिक कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार देश के सबसे अधिक संपत्ति वाले मुख्यमंत्री हैं। उनकी घोषित संपत्ति 1,413 करोड़ रुपये से अधिक है। इसके बाद आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू दूसरे स्थान पर हैं, जिनकी कुल घोषित संपत्ति 931 करोड़ रुपये है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय 648 करोड़ रुपये की संपत्ति के साथ तीसरे स्थान पर हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, देश के 31 मुख्यमंत्रियों की कुल घोषित संपत्ति 3,660 करोड़ रुपये है। इनमें चार मुख्यमंत्री अरबपति हैं, जबकि 25 मुख्यमंत्री करोड़पति हैं। सभी 31 मुख्यमंत्रियों की औसत घोषित संपत्ति 118.07 करोड़ रुपये है।
चार मुख्यमंत्रियों की संपत्ति 1 अरब रुपये से अधिक
ADR के विश्लेषण में पाया गया कि 31 में से चार मुख्यमंत्री ऐसे हैं, जिन्होंने 100 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति घोषित की है। यह संख्या कुल मुख्यमंत्रियों का लगभग 13 प्रतिशत है।
14 मुख्यमंत्रियों ने घोषित किए आपराधिक मामले
ADR की रिपोर्ट में मुख्यमंत्रियों की आपराधिक पृष्ठभूमि का भी विश्लेषण किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक 31 मुख्यमंत्रियों में से 14 ने अपने खिलाफ आपराधिक मामलों की जानकारी चुनावी हलफनामे में दी है। इनमें 11 मुख्यमंत्री ऐसे हैं, जिन पर गंभीर आपराधिक आरोप दर्ज हैं।
ADR एक गैर-सरकारी संस्था है, जो चुनावी और राजनीतिक सुधारों, पारदर्शिता तथा नेताओं की जवाबदेही से जुड़े मुद्दों पर काम करती है। संस्था समय-समय पर चुनावी हलफनामों के आधार पर ऐसी रिपोर्ट जारी करती रहती है।
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