वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को सत्ता से हटाने की अमेरिकी योजना को लेकर व्हाइट हाउस के भीतर मतभेद सामने आए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रीय खुफिया निदेशक (DNI) तुलसी गबार्ड को महीनों तक चली इस गोपनीय योजना से बाहर रखा गया था। इसका कारण यह बताया गया कि गबार्ड पहले वेनेजुएला में सैन्य हस्तक्षेप का विरोध कर चुकी हैं, जिससे उनके इस अभियान का समर्थन करने को लेकर संदेह था।
मामले से जुड़े सूत्रों के अनुसार, व्हाइट हाउस में यह बात इतनी मशहूर थी कि कुछ अधिकारी मजाक में DNI का मतलब “डू नॉट इनवाइट” (आमंत्रित न करें) बताने लगे थे, हालांकि व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने ऐसे किसी मजाक से इनकार किया है। 2019 में डेमोक्रेट सांसद रहते हुए तुलसी गबार्ड ने कहा था कि अमेरिका को वेनेजुएला से “दूर रहना चाहिए” और हाल ही में उन्होंने युद्ध समर्थकों की आलोचना भी की थी।
इस घटनाक्रम ने ट्रंप प्रशासन के भीतर चल रहे मतभेदों को उजागर कर दिया है। हालांकि, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इन दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि न तो उन्हें और न ही गबार्ड को योजना से बाहर रखा गया था। वेंस ने कहा, “हम सभी एक ही टीम का हिस्सा हैं।” व्हाइट हाउस के संचार निदेशक स्टीवन चेउंग ने भी कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप को तुलसी गबार्ड पर पूरा भरोसा है।
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एक वरिष्ठ खुफिया अधिकारी ने बताया कि गबार्ड ने इस मिशन में खुफिया जानकारी उपलब्ध कराई, भले ही उनकी भूमिका ज्यादा विश्लेषणात्मक रही हो। हालांकि, व्हाइट हाउस द्वारा जारी तस्वीरों में मादुरो अभियान के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप और उनके करीबी सहयोगी नजर आए, लेकिन तुलसी गबार्ड उनमें शामिल नहीं थीं।
विशेषज्ञों का कहना है कि इतने बड़े ऑपरेशन में DNI की गैर-मौजूदगी असामान्य है और यह ट्रंप टीम के भीतर गबार्ड की भूमिका को लेकर संदेह को दर्शाता है। इसके बावजूद, गबार्ड लगातार राष्ट्रपति को ब्रीफ कर रही हैं और ओवल ऑफिस की बैठकों में हिस्सा लेती रही हैं।
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