आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘दिमागी नक्सल’ वाले बयान पर तीखा हमला बोला। केजरीवाल ने खुद को ‘दिमागी नक्सल’ बताते हुए कहा कि उन्हें भाजपा या प्रधानमंत्री से डर नहीं लगता। उन्होंने दावा किया कि जो लोग देश में बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं, सड़कें और बदलाव की मांग करते हैं, उन्हें भी प्रधानमंत्री की परिभाषा के अनुसार ‘दिमागी नक्सल’ कहा जा सकता है।
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री केजरीवाल ने कहा कि यदि भगत सिंह और डॉ. भीमराव आंबेडकर आज जीवित होते, तो प्रधानमंत्री मोदी उन्हें भी ‘दिमागी नक्सल’ कह देते। उन्होंने कहा कि वह खुद को ‘दिमागी नक्सल’ कहे जाने पर गर्व महसूस करते हैं, क्योंकि वह सच्चे देशभक्त हैं।
मोदी के बयान पर केजरीवाल का पलटवार
केजरीवाल ने कहा कि जो व्यक्ति सरकार से सवाल करता है, शिक्षा व्यवस्था में बदलाव चाहता है और देशभर में अच्छे अस्पताल तथा सड़क जैसी सुविधाओं की मांग करता है, उसे ‘दिमागी नक्सल’ कहा जा रहा है। उन्होंने कहा कि जो लोग भाजपा से नहीं डरते और ‘विकसित भारत’ बनाना चाहते हैं, वे भी इस श्रेणी में रखे जा सकते हैं।
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स्वतंत्रता दिवस पर मोदी ने क्या कहा था?
प्रधानमंत्री मोदी ने 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से दिए अपने स्वतंत्रता दिवस संबोधन में ‘दिमागी नक्सल’ शब्द का इस्तेमाल करते हुए ऐसे लोगों की पहचान कर उन्हें अलग-थलग करने की अपील की थी। उनके बयान के बाद विपक्षी दलों और भाजपा के बीच राजनीतिक बहस तेज हो गई।
कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने भी खुद को ‘गर्वित दिमागी नक्सल’ बताया था। इसके बाद भाजपा सांसद और राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने चिदंबरम पर पलटवार करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के 2006 के बयान का हवाला दिया, जिसमें उन्होंने नक्सलवाद को देश की सबसे बड़ी आंतरिक सुरक्षा चुनौती बताया था।
इस मुद्दे पर भाजपा, कांग्रेस और अब आम आदमी पार्टी के नेताओं के बीच बयानबाजी तेज हो गई है।
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