जम्मू-कश्मीर की केरन घाटी में नियंत्रण रेखा (एलओसी) के पास 80वें स्वतंत्रता दिवस का ऐतिहासिक समारोह आधी रात को आयोजित किया गया। इस दौरान आसमान आतिशबाजी से रोशन हो उठा और पूरा इलाका देशभक्ति के नारों से गूंज उठा। जम्मू-कश्मीर समेत पूरे देश में स्वतंत्रता दिवस उत्साह और देशभक्ति की भावना के साथ मनाया गया।
इस अवसर पर जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने श्रीनगर के प्रतिष्ठित बख्शी स्टेडियम में राष्ट्रीय ध्वज फहराया। अपने स्वतंत्रता दिवस संबोधन में उन्होंने नियंत्रण रेखा के दूसरी ओर स्थित जम्मू-कश्मीर के हिस्से का उल्लेख करते हुए कहा कि आज वहां की परिस्थितियों को देखकर उन्हें लगता है कि आठ दशक पहले देश के नेताओं ने जो निर्णय लिया था, वह सही था।
उमर अब्दुल्ला ने कहा कि सीमा पार की मौजूदा परिस्थितियों को देखकर दर्द और चिंता होती है। उन्होंने कहा कि यदि 2019 में परिस्थितियां नहीं बदली होतीं, तो संभव है कि नियंत्रण रेखा के उस पार के जम्मू-कश्मीर के लोग आज भारत के साथ फिर से जुड़ने की मांग कर रहे होते।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि नियंत्रण रेखा के उस पार का जम्मू-कश्मीर भारत का हिस्सा है और वहां रहने वाले लोग भी अपने ही हैं। उन्होंने बताया कि जम्मू-कश्मीर विधानसभा में उनके लिए सीटें आरक्षित हैं और उम्मीद है कि भविष्य में वे इन सीटों का प्रतिनिधित्व कर सकेंगे।
उमर अब्दुल्ला ने लोकतंत्र और संघवाद को देश की दो प्रमुख ताकतें बताया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की हर परिस्थिति में रक्षा करना और उसे मजबूत बनाना देश की प्राथमिक जिम्मेदारी है। साथ ही संघीय व्यवस्था की रक्षा और मजबूती भी जरूरी है।
इस बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले से अपने स्वतंत्रता दिवस संबोधन में महिला आरक्षण के मुद्दे पर राजनीतिक दलों से सहयोग की अपील की। उन्होंने लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
प्रधानमंत्री ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम का उल्लेख करते हुए कहा कि महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने के लिए सभी दलों को आगे आना चाहिए।
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