मणिपुर में जारी जातीय तनाव के बीच कूकी-जो समुदाय ने एक बार फिर अपने लिए अलग केंद्र शासित प्रदेश (यूनियन टेरिटरी) की मांग को दोहराया है। हाल ही में आयोजित रैली के बाद कूकी-जो काउंसिल (KZC) ने साफ किया कि उनकी यह मांग अटल है और मौजूदा परिस्थितियों में कूकी-जो जनजातियों का गैर-जनजातीय मैतेई समुदाय के साथ सह-अस्तित्व बेहद कठिन है।
कूकी-जो काउंसिल, जो इन जनजातियों की शीर्ष नागरिक संस्था है, ने यह भी चेतावनी दी कि मैतेई समुदाय से जुड़े आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों (आईडीपी) को “बफर जोन” या कूकी-जो बहुल इलाकों के पास दोबारा बसाने की किसी भी कोशिश का वे कड़ा विरोध करेंगे। परिषद का कहना है कि ऐसे कदम से क्षेत्र में तनाव और हिंसा बढ़ सकती है तथा शांति बहाली के प्रयासों को गंभीर नुकसान पहुंचेगा।
KZC ने अपने बयान में कहा कि पिछले कई महीनों से मणिपुर में जातीय संघर्ष ने कूकी-जो समुदाय को असुरक्षा की भावना में डाल दिया है। उनका आरोप है कि उन्हें न केवल जान-माल का नुकसान झेलना पड़ा है, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक रूप से भी हाशिए पर धकेला गया है। इसी कारण वे केंद्र सरकार से सीधे प्रशासित एक अलग प्रशासनिक व्यवस्था की मांग कर रहे हैं, जिससे उनकी सुरक्षा, पहचान और अधिकारों की रक्षा हो सके।
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परिषद ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी मांग किसी समुदाय के खिलाफ नहीं है, बल्कि अपने लोगों के सुरक्षित भविष्य के लिए है। KZC का कहना है कि जब तक स्थायी और निष्पक्ष समाधान नहीं निकलता, तब तक कूकी-जो समुदाय अपनी मांग से पीछे नहीं हटेगा।
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