खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच कुवैत में एक बड़े ड्रोन हमले के बाद तेल रिफाइनरी में भीषण आग लग गई। रिपोर्ट के अनुसार, यह हमला मीना अल-अहमदी रिफाइनरी पर हुआ, जो मध्य पूर्व की सबसे बड़ी तेल रिफाइनरियों में से एक है और जिसकी उत्पादन क्षमता लगभग 7,30,000 बैरल प्रतिदिन है।
कुवैत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन ने बताया कि हमले में कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन आग से भारी नुकसान हुआ है। इसके अलावा, एक अन्य रिफाइनरी में भी ड्रोन हमले के बाद आग लगने की खबर है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब ईरान ने खाड़ी देशों के ऊर्जा ढांचे पर हमले तेज कर दिए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, कतर के एलएनजी संयंत्रों और अन्य महत्वपूर्ण ऊर्जा ठिकानों को भी निशाना बनाया गया है। इससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है।
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संयुक्त अरब अमीरात के तट के पास एक जहाज में आग लगने और कतर के पास एक अन्य जहाज को नुकसान पहुंचने की खबरें भी सामने आई हैं। यह स्थिति होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान के बढ़ते दबाव को दर्शाती है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण मार्ग है।
कतर, सऊदी अरब और यूएई ने इन हमलों की कड़ी निंदा की है। सऊदी अरब के शीर्ष राजनयिक ने कहा कि इन हमलों ने विश्वास को पूरी तरह खत्म कर दिया है।
इस बीच, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है। ब्रेंट क्रूड की कीमत 110 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई है, जो युद्ध शुरू होने के बाद 50 प्रतिशत से अधिक बढ़ चुकी है।
यह घटनाएं मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर गंभीर प्रभाव डाल रही हैं।
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