दिल्ली की राउज एवेन्यू अदालत ने कथित आईआरसीटीसी घोटाला मामले में राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) प्रमुख लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी और बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी तथा उनके बेटे तेजस्वी यादव के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया है। विशेष न्यायाधीश (पीसी एक्ट) विशाल गोगने ने गुरुवार को यह आदेश पारित किया।
अदालत ने कहा कि तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव द्वारा पद के दुरुपयोग की मजबूत आशंका दिखाई देती है। अदालत के अनुसार, उन्होंने रेलवे मंत्रालय का इस्तेमाल निजी प्रभाव क्षेत्र की तरह किया और रेलवे अधिकारियों तथा सहयोगियों के साथ मिलीभगत कर जमीन के टुकड़े हासिल किए।
अदालत ने लारा प्रोजेक्ट्स, सरला गुप्ता, प्रेम चंद गुप्ता, सुजाता होटल्स, विनय कोचर और विजय कोचर के खिलाफ भी आरोप तय करने का आदेश दिया। वहीं राहुल यादव, गौरव गुप्ता, नाथ मल कंकरनिया, विजय त्रिपाठी, डीएन तुलस्यान, राजीव रेलन और अभिषेक फाइनेंस को आरोपों से मुक्त कर दिया गया।
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अदालत की टिप्पणी के बाद तेजस्वी यादव ने कहा कि यह अदालत का मामला है और इसका फैसला अदालत में ही होगा। उन्होंने कहा कि उनका पक्ष मजबूती से रखा जाएगा।
सीबीआई के अनुसार, 2004 से 2014 के बीच लालू यादव ने सरला गुप्ता, सुजाता होटल्स की मालिक और आईआरसीटीसी अधिकारियों के साथ कथित आपराधिक साजिश रची। जांच एजेंसी का आरोप है कि बीएनआर होटल्स को कथित रूप से हेरफेर किए गए टेंडर के जरिए सुजाता होटल्स को सौंपा गया और इसके बाद पटना में जमीन हासिल की गई।
लालू परिवार ने आरोपों का विरोध किया है। बाद में प्रवर्तन निदेशालय ने भी तत्कालीन रेल मंत्री के खिलाफ मामला दर्ज किया था। सीबीआई ने इसे आर्थिक लाभ हासिल करने की कथित साजिश बताया है।
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