केंद्र सरकार संसद में एक बड़ा संवैधानिक संशोधन विधेयक पेश करने जा रही है, जिसके तहत लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों को बढ़ाकर लगभग 850 किया जाएगा। यह विधेयक 16 अप्रैल को लोकसभा में प्रस्तुत किया जाएगा।
इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण को प्रभावी रूप से लागू करना बताया गया है। इसके लिए सीटों की संख्या बढ़ाने और परिसीमन प्रक्रिया को नए सिरे से लागू करने का प्रावधान किया गया है।
प्रस्तावित विधेयक के अनुसार संविधान के अनुच्छेद 81 में संशोधन किया जाएगा, जिसके तहत राज्यों से अधिकतम 815 सदस्य और केंद्र शासित प्रदेशों से अधिकतम 35 सदस्य लोकसभा के लिए चुने जा सकेंगे।
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सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस प्रक्रिया के लिए 2011 की जनगणना के आंकड़ों का उपयोग किया जाएगा, क्योंकि यही उपलब्ध नवीनतम जनसंख्या डेटा है। विधेयक में “जनसंख्या” को अंतिम प्रकाशित जनगणना के आंकड़ों के आधार पर परिभाषित किया गया है।
सरकार का कहना है कि आगामी जनगणना और उसके बाद होने वाली परिसीमन प्रक्रिया में काफी समय लग सकता है, जिससे महिलाओं की प्रभावी भागीदारी में देरी होगी। इसलिए इस विधेयक का उद्देश्य महिला आरक्षण को जल्द लागू करना है।
विधेयक में यह भी प्रावधान है कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की महिलाओं को भी आरक्षण का लाभ मिलेगा। इसके साथ ही दिल्ली, जम्मू-कश्मीर और पुडुचेरी जैसे केंद्र शासित प्रदेशों में भी इस व्यवस्था को लागू करने के लिए अलग-अलग विधेयक लाए जाएंगे।
सरकार का मानना है कि यह कदम भारतीय लोकतंत्र में महिलाओं की भागीदारी को मजबूत करेगा और प्रतिनिधित्व प्रणाली को अधिक समावेशी बनाएगा।
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