तेलंगाना के आदिलाबाद जिले के नारनूर मंडल स्थित जमिडी गांव में पारंपरिक महुआ (इप्पा) फूल महोत्सव ‘इप्पा पुव्वु पंडुगा’ का आयोजन बड़े उत्साह के साथ किया गया। यह वार्षिक आयोजन इंटीग्रेटेड ट्राइबल डेवलपमेंट एजेंसी (ITDA), उत्नूर के तत्वावधान में आदिवासी (गोंडवाना) संगठनों के सहयोग से आयोजित किया गया।
इस अवसर पर आदिलाबाद के जिला कलेक्टर राजराशी शाह ने महुआ फूलों के आर्थिक और सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इप्पा फूल आदिवासी अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और इनके माध्यम से ग्रामीण समुदायों की आजीविका को मजबूत किया जा सकता है।
कलेक्टर ने आदिवासी समुदाय से अपील की कि वे महुआ फूलों का संग्रह वैज्ञानिक तरीके से करें ताकि उनकी गुणवत्ता और उपयोगिता को बढ़ाया जा सके। उन्होंने कहा कि सही तरीके से संग्रह और प्रसंस्करण के जरिए आदिवासी समाज आर्थिक आत्मनिर्भरता की ओर आगे बढ़ सकता है।
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राजराशी शाह ने यह भी कहा कि जंगलों और पेड़ों का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है क्योंकि ये आदिवासी जीवन और संस्कृति का आधार हैं। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से ही आने वाली पीढ़ियों को समृद्ध जीवन मिल सकेगा।
कार्यक्रम में आदिवासी परंपराओं, संस्कृति और उनकी जीवनशैली को भी प्रदर्शित किया गया। स्थानीय लोगों ने पारंपरिक नृत्य और गीतों के माध्यम से अपनी सांस्कृतिक विरासत को प्रस्तुत किया।
आयोजकों ने बताया कि महुआ फूल न केवल आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह आदिवासी समाज की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान का भी प्रतीक है।
इस आयोजन का उद्देश्य आदिवासी समुदायों में जागरूकता बढ़ाना और उन्हें प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग के लिए प्रेरित करना है।
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