गुजरात में मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 की फाइलिंग को लेकर विवाद बढ़ गया है। राज्य में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) के दौरान कई मतदाताओं ने दावा किया कि उनके नाम, फ़ोन नंबर और मतदाता पहचान पत्र (EPIC) नंबर का दुरुपयोग किया गया और उनके हस्ताक्षर की नकल कर फर्जी आवेदन दाखिल किए गए। कुछ मतदाताओं ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें सैकड़ों फॉर्म-7 पर हस्ताक्षर करने को कहा गया और बताया गया कि यह फॉर्म नाम जोड़ने के लिए हैं, जबकि असल में यह नाम हटाने के लिए फाइल किए गए थे।
विपक्षी दलों, जिनमें कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (AAP) शामिल हैं, ने आरोप लगाया कि राज्य में सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं ने इस प्रक्रिया को योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दिया। उनका कहना है कि विपक्ष और अल्पसंख्यक क्षेत्रों को निशाना बनाने के लिए पहले से टाइप किए गए फॉर्म्स का उपयोग करके आवेदन दाखिल किए गए। विपक्ष के अनुसार, जबकि आपत्ति दर्ज करने वालों के नाम और हस्ताक्षर हाथ से लिखे हुए दिखते हैं, आवेदन वास्तव में बड़े पैमाने पर फाइल किए गए, जिससे राज्य में लाखों मतदाताओं के नाम हटने का खतरा उत्पन्न हुआ।
राजनीतिक हलकों में इसे गंभीर चुनावी अनियमितता के रूप में देखा जा रहा है। मतदाता अधिकार संगठन भी इस घटना की जांच की मांग कर रहे हैं और सख्त कार्रवाई की अपील कर रहे हैं। चुनाव आयोग ने अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन यह विवाद आगामी चुनावों से पहले गुजरात में राजनीतिक उथल-पुथल पैदा कर रहा है।
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