बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने धर्म को राजनीति से जोड़ने की प्रवृत्ति को खतरनाक बताते हुए कहा है कि संकीर्ण राजनीतिक स्वार्थों के लिए ऐसा करना हमेशा गंभीर जोखिम पैदा करता है। उन्होंने यह टिप्पणी शनिवार (24 जनवरी, 2026) को उस समय की, जब प्रयागराज में माघ मेला प्रशासन और बदरीनाथ स्थित ज्योतिर्मठ के प्रमुख स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बीच विवाद चल रहा है।
मायावती ने कहा कि न केवल उत्तर प्रदेश में, बल्कि देश के अन्य हिस्सों में भी हाल के वर्षों में धार्मिक आयोजनों, अनुष्ठानों, स्नान पर्वों और अन्य धार्मिक गतिविधियों में राजनीतिक हस्तक्षेप और प्रभाव काफी बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि इस तरह के हस्तक्षेप से नए विवाद, तनाव और टकराव पैदा हो रहे हैं, जो किसी भी दृष्टि से उचित नहीं हैं। ऐसे हालात लोगों में स्वाभाविक रूप से चिंता और असंतोष पैदा करते हैं।
बसपा प्रमुख ने कहा कि संकीर्ण राजनीतिक लाभ के लिए धर्म और राजनीति को जोड़ना हमेशा खतरों से भरा होता है। प्रयागराज में धार्मिक स्नान को लेकर चल रहा मौजूदा विवाद, जिसमें एक-दूसरे के प्रति असम्मान और आरोप-प्रत्यारोप देखने को मिल रहे हैं, इसका ताजा उदाहरण है। उन्होंने सुझाव दिया कि हर हाल में ऐसी परिस्थितियों से बचना बेहतर होगा।
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मायावती ने कहा कि संविधान और कानून सार्वजनिक कल्याण को केंद्र में रखे गए कार्यों को ही सच्चा राष्ट्रीय कर्तव्य मानते हैं और धर्म को राजनीति से अलग रखते हैं। उन्होंने इस सिद्धांत को सही नीति और नीयत के साथ लागू करने पर जोर दिया, ताकि राजनीतिक नेतृत्व समाज के सभी वर्गों के सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक हित में निष्पक्ष और ईमानदारी से अपने संवैधानिक दायित्वों का निर्वहन कर सके।
उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में भी जनता यही अपेक्षा करती है और प्रयागराज में धार्मिक स्नान को लेकर चल रहे कड़वे विवाद को आपसी सहमति से जल्द सुलझाया जाना चाहिए। मायावती ने इस अवसर पर उत्तर प्रदेश दिवस की शुभकामनाएं भी दीं।
उल्लेखनीय है कि माघ मेला प्रशासन ने सोमवार को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस जारी कर यह स्पष्ट करने को कहा था कि वह स्वयं को ज्योतिर्मठ का शंकराचार्य किस आधार पर बता रहे हैं, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने इस पद से जुड़े मामले में अपील के निपटारे तक किसी की नियुक्ति पर रोक लगा रखी है। माघ मेला के दौरान मौनी अमावस्या पर कथित रूप से पवित्र स्नान से रोके जाने के बाद यह विवाद और गहरा गया।
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