हाई कोर्ट के अधिवक्ता करुणा सागर ने कांग्रेस की राज्यसभा उम्मीदवार मीनााक्षी नटराजन के नामांकन पत्र को खारिज किए जाने का बचाव किया है। उन्होंने कहा कि रिटर्निंग ऑफिसर ने यह निर्णय पूरी तरह कानून के अनुसार लिया है।
करुणा सागर ने आरोप लगाया कि मीनााक्षी नटराजन ने अपने चुनावी शपथपत्र (इलेक्शन एफिडेविट) में एक लंबित आपराधिक मामले की जानकारी को छिपाया था। इसी कारण उनके नामांकन पत्र को खारिज किया गया।
उन्होंने कहा कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और सही जानकारी देना अनिवार्य है। यदि कोई उम्मीदवार महत्वपूर्ण जानकारी छिपाता है, तो रिटर्निंग ऑफिसर के पास उसका नामांकन रद्द करने का पूरा अधिकार होता है।
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यह मामला तब सामने आया जब नामांकन की जांच के दौरान कथित रूप से यह पाया गया कि उम्मीदवार ने अपने खिलाफ चल रहे आपराधिक मामले का उल्लेख सही तरीके से नहीं किया था। इसके बाद रिटर्निंग ऑफिसर ने उनका नामांकन अस्वीकार कर दिया।
अधिवक्ता ने यह भी कहा कि चुनाव आयोग के नियम स्पष्ट हैं और हर उम्मीदवार को अपने खिलाफ लंबित मामलों, संपत्ति और अन्य विवरणों की पूरी जानकारी देना आवश्यक होता है।
इस फैसले के बाद राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई है। कांग्रेस पार्टी की ओर से अभी इस मामले पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं आई है, जबकि विपक्षी दलों ने इसे चुनावी नियमों के पालन का मामला बताया है।
वहीं कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में पारदर्शिता बनाए रखना लोकतांत्रिक प्रक्रिया की मजबूती के लिए जरूरी है।
अब यह मामला आगे कानूनी और राजनीतिक चर्चा का विषय बना हुआ है, और सभी की नजर इस पर है कि आगे की प्रक्रिया में क्या कदम उठाए जाते हैं।
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