राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा है कि भारत के पास पूरी मानवता को दिशा देने की क्षमता है और आने वाले समय में दुनिया को भारत द्वारा दिखाए गए मार्ग का अनुसरण करना होगा। उन्होंने यह बात महाराष्ट्र के नागपुर में आरएसएस प्रचारकों के जीवन और योगदान पर आधारित वीडियो श्रृंखला के 100वें यूट्यूब वीडियो के लोकार्पण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कही।
अपने संबोधन में मोहन भागवत ने कहा कि भारत की संस्कृति, जीवन-दर्शन और मूल्य केवल देश के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी मानवता के कल्याण के लिए महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि भारत का उद्देश्य किसी पर प्रभुत्व स्थापित करना नहीं, बल्कि विश्व को शांति, सहयोग और मानवीय मूल्यों का मार्ग दिखाना है।
उन्होंने आरएसएस प्रचारकों के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि संघ के स्वयंसेवकों ने समाज सेवा, राष्ट्र निर्माण और सांस्कृतिक जागरण के क्षेत्र में निस्वार्थ भाव से कार्य किया है। उनके जीवन से समाज को प्रेरणा मिलती है और नई पीढ़ी में राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना विकसित होती है।
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भागवत ने कहा कि भारत का विकास केवल आर्थिक प्रगति तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि नैतिक मूल्यों, सामाजिक समरसता और मानवीय संवेदनाओं के साथ आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने विश्वास जताया कि भारत की विचारधारा भविष्य में वैश्विक स्तर पर सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम बनेगी।
कार्यक्रम के दौरान आरएसएस प्रचारकों के जीवन, संघर्ष और सेवा कार्यों पर आधारित वीडियो श्रृंखला के 100वें एपिसोड का भी विमोचन किया गया। इस अवसर पर संघ के कई वरिष्ठ पदाधिकारी, स्वयंसेवक और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम में राष्ट्र निर्माण, सामाजिक सेवा और भारतीय संस्कृति के संरक्षण में संघ की भूमिका पर भी विस्तार से चर्चा की गई।
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