भारत में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के दौरान 1 जून से 13 जुलाई तक कई राज्यों में बारिश का असमान वितरण देखने को मिला है। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, देश के कई हिस्सों में सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई, जबकि कुछ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भारी बारिश हुई है।
मौसम विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, पूर्वोत्तर भारत के कई राज्यों में बारिश की भारी कमी रही। मणिपुर में सामान्य से 73 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई, जो देश में सबसे बड़ी कमी है। वहीं, मेघालय में 54 प्रतिशत, अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड में 50-50 प्रतिशत कम वर्षा हुई।
बिहार और झारखंड में भी मॉनसून कमजोर रहा। बिहार में सामान्य से 44 प्रतिशत और झारखंड में 43 प्रतिशत कम बारिश रिकॉर्ड की गई। असम में बारिश की कमी 34 प्रतिशत रही। इसके अलावा गोवा में 33 प्रतिशत, केरल में 29 प्रतिशत, तेलंगाना में 26 प्रतिशत और आंध्र प्रदेश में 25 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई।
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उत्तर भारत के कई राज्यों में भी बारिश सामान्य से कम रही। उत्तर प्रदेश में 19 प्रतिशत, जम्मू-कश्मीर में 15 प्रतिशत और पंजाब में 28 प्रतिशत कम बारिश हुई। वहीं, दिल्ली में सामान्य से 15 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई।
दूसरी ओर, केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में मॉनसून ने शानदार प्रदर्शन किया। यहां सामान्य से 71 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में 28 प्रतिशत अधिक वर्षा हुई। सिक्किम और तमिलनाडु में भी सामान्य से 16 प्रतिशत ज्यादा बारिश रिकॉर्ड की गई। ओडिशा में 4 प्रतिशत अधिक वर्षा हुई।
महाराष्ट्र में बारिश सामान्य के करीब रही, जहां 5 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई। मध्य प्रदेश में बारिश में केवल 3 प्रतिशत की कमी रही।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, मॉनसून के शुरुआती चरण में बारिश का यह असमान वितरण कृषि और जल संसाधनों पर असर डाल सकता है। आने वाले दिनों में मॉनसून की सक्रियता से कई राज्यों में बारिश की स्थिति सुधरने की उम्मीद जताई जा रही है।
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