मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर बड़ी तैयारी शुरू हो गई है। राज्य सरकार यूसीसी के मसौदा विधेयक को अगले सप्ताह शुरू होने वाले विधानसभा के मानसून सत्र में पेश करने की योजना बना रही है। इसके लिए 18 जुलाई को भोपाल के जदिशपुर में होने वाली विशेष कैबिनेट बैठक में विधेयक के प्रारूप को मंजूरी दिलाई जाएगी।
सरकार से जुड़े सूत्रों के अनुसार, कैबिनेट की स्वीकृति मिलने के बाद यूसीसी विधेयक को विधानसभा के पटल पर रखा जाएगा। पांच दिवसीय मानसून सत्र के दौरान इस विधेयक पर चर्चा होने की संभावना है। राज्य सरकार का कहना है कि यूसीसी का उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए व्यक्तिगत कानूनों में समानता और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पहले ही यूसीसी को लेकर गठित उच्च स्तरीय समिति की रिपोर्ट प्राप्त कर ली है। समिति ने अपनी रिपोर्ट तीन खंडों में तैयार की है, जिसमें सिफारिशें, प्रस्तावित विधेयक का प्रारूप और जनता से प्राप्त सुझाव शामिल हैं।
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समिति द्वारा तैयार किए गए प्रस्तावित विधेयक में विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार, दत्तक ग्रहण और लिव-इन संबंधों जैसे व्यक्तिगत मामलों से जुड़े प्रावधान शामिल किए गए हैं। समिति को राज्यभर से बड़ी संख्या में सुझाव प्राप्त हुए थे, जिनका अध्ययन करने के बाद रिपोर्ट तैयार की गई है।
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि यूसीसी लागू करते समय सामाजिक और सांस्कृतिक विविधताओं का ध्यान रखा जाएगा। समिति ने अपनी रिपोर्ट में अनुसूचित जनजातियों को समान नागरिक संहिता के दायरे से बाहर रखने की सिफारिश भी की है।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा है कि यूसीसी जैसे महत्वपूर्ण विषय पर सभी पक्षों को अपनी राय स्पष्ट करनी चाहिए। उन्होंने विपक्ष, विशेषकर कांग्रेस, से भी इस मुद्दे पर अपना रुख बताने की अपील की है।
वहीं, विपक्ष की ओर से इस विधेयक को लेकर कई सवाल उठाए जा रहे हैं। अब सभी की नजरें विधानसभा सत्र पर हैं, जहां यूसीसी विधेयक पर राजनीतिक बहस होने की संभावना है।
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