मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति ने अपनी अंतिम रिपोर्ट मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को सौंप दी है। मुख्यमंत्री ने निर्धारित समय सीमा में प्रतिवेदन प्रस्तुत करने पर समिति की अध्यक्ष और सभी सदस्यों का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर समिति के सदस्य प्रो. गोपाल शर्मा, बुधपाल सिंह, शोभा पैठणकर और सदस्य सचिव अजय कटेसरिया उपस्थित रहे।
समिति की रिपोर्ट तीन अलग-अलग खंडों में तैयार की गई है। पहले खंड में समिति की अनुशंसाएं शामिल हैं। इसमें अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर लागू विभिन्न कानूनों, परंपराओं और व्यवस्थाओं का अध्ययन कर सुझाव दिए गए हैं। यह भाग 10 अध्यायों में विभाजित है।
रिपोर्ट का दूसरा खंड प्रस्तावित समान नागरिक संहिता विधेयक का प्रारूप है। इसमें मध्य प्रदेश की वर्तमान कानूनी व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए मसौदा तैयार किया गया है। प्रस्तावित विधेयक में चार भाग, 404 धाराएं और सात अनुसूचियां शामिल हैं।
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तीसरे खंड में जन-परामर्श का विस्तृत विवरण दिया गया है। समिति ने जिला स्तर, राज्य स्तर और ऑनलाइन माध्यम से व्यापक सुझाव आमंत्रित किए थे। समिति को 9.58 लाख से अधिक सुझाव प्राप्त हुए, जिनका प्रश्नवार, लिंगवार और समुदायवार विश्लेषण रिपोर्ट में शामिल किया गया है।
समिति ने अपनी अनुशंसाओं में अनुसूचित जनजातियों को समान नागरिक संहिता के दायरे से बाहर रखने का सुझाव दिया है। समिति का कहना है कि सामाजिक और सांस्कृतिक विविधताओं को ध्यान में रखते हुए यह सिफारिश की गई है।
राज्य सरकार ने समिति को विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार, दत्तक ग्रहण और लिव-इन संबंधों जैसे व्यक्तिगत एवं पारिवारिक कानूनों का अध्ययन कर राज्य के अनुरूप मसौदा तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी थी। समिति ने लैंगिक समानता, संवैधानिक प्रावधानों और परंपराओं के सम्मान को आधार बनाकर रिपोर्ट तैयार की है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि रिपोर्ट विधि विभाग को सौंप दी गई है। आवश्यक कानूनी प्रक्रिया और मंत्रिपरिषद की मंजूरी के बाद इसे आगामी मानसून सत्र में विधानसभा में पेश किए जाने की संभावना है। साथ ही उन्होंने कांग्रेस से भी यूसीसी पर अपना स्पष्ट रुख सार्वजनिक करने की अपील की।
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