एक नए अध्ययन में खुलासा हुआ है कि मुंबई महानगरपालिका (BMC) के कुल बजट में शहर के 24 प्रशासनिक वार्डों को मिलने वाले फंड में पिछले कुछ वर्षों के दौरान उल्लेखनीय गिरावट आई है। रिपोर्ट के अनुसार, वार्ड स्तर पर आबंटित फंड अब कुल बीएमसी बजट का मात्र 11% रह गया है, जबकि 2015 में यह हिस्सा लगभग 18% था। यह गिरावट शहरी संसाधनों के असमान वितरण और स्थानीय विकास योजनाओं पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव को उजागर करती है।
अध्ययन में बताया गया है कि कई घनी आबादी वाले वार्डों, विशेषकर उपनगरों में, आबादी के अनुपात में फंड का वितरण बहुत कम है। कुछ वार्ड जहां जनसंख्या तेजी से बढ़ रही है, वहां बुनियादी ढांचे, स्वच्छता, जल आपूर्ति और सड़कों के रखरखाव जैसे क्षेत्रों में बजटीय आवंटन अपर्याप्त है। दूसरी ओर, कुछ कम आबादी वाले वार्डों को तुलनात्मक रूप से अधिक फंड मिल रहे हैं, जिससे शहर के भीतर आर्थिक और सामाजिक असमानता और बढ़ रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह प्रवृत्ति स्थानीय स्वशासन की क्षमता को कमजोर करती है और नागरिक सेवाओं की गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव डालती है। अध्ययन ने सुझाव दिया है कि बीएमसी को फंड आवंटन की प्रक्रिया में पारदर्शिता लानी चाहिए और इसे जनसंख्या, क्षेत्रीय जरूरतों तथा सामाजिक-आर्थिक संकेतकों के आधार पर पुनर्गठित करना चाहिए।
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रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अगर यही स्थिति बनी रही, तो आने वाले वर्षों में मुंबई के कई वार्डों में बुनियादी सेवाओं का संकट गहराता जाएगा।
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