पश्चिम एशिया में पिछले तीन महीनों से अधिक समय से जारी अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष अब समाप्ति की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। दोनों देशों ने संकेत दिए हैं कि शांति समझौता पहले से कहीं अधिक करीब है। हालांकि, होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा पूरी तरह खोलने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर अब भी स्पष्ट सहमति नहीं बन पाई है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस सप्ताह दावा किया था कि शांति समझौते का मसौदा लगभग तैयार हो चुका है और इस पर सप्ताहांत में यूरोप में हस्ताक्षर हो सकते हैं। उन्होंने बताया था कि अमेरिका की ओर से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इस प्रक्रिया का नेतृत्व करेंगे।
इसके एक दिन बाद ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने भी कहा कि समझौता "पहले से कहीं अधिक करीब" है। उन्होंने कहा कि "इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग" को अंतिम रूप देने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है और जल्द ही इसकी पूरी जानकारी सार्वजनिक की जाएगी।
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हालांकि, ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद बने हुए हैं। ट्रंप ने दावा किया है कि समझौते के तहत ईरान परमाणु हथियार विकसित करने की दिशा में अपनी गतिविधियां समाप्त करेगा। व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने भी कहा कि प्रस्तावित समझौते में ईरान के परमाणु कार्यक्रम को समाप्त करने और संवर्धित परमाणु सामग्री को नष्ट करने का प्रावधान शामिल है।
दूसरी ओर, अराघची ने स्पष्ट किया कि परमाणु मुद्दे पर आगे की बातचीत तभी होगी जब प्रारंभिक समझौते की शर्तों का पालन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि समझौते के बाद अमेरिका को अपनी जिम्मेदारियां पूरी करने के लिए 60 दिन का समय दिया जाएगा।
होर्मुज जलडमरूमध्य के मुद्दे पर दोनों पक्ष अपेक्षाकृत सहमत दिखाई दे रहे हैं। ईरान ने जहाजों की सुरक्षित आवाजाही की गारंटी देने की बात कही है, जबकि अमेरिका इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को फिर से पूरी तरह खोलने की उम्मीद जता रहा है। फिलहाल दोनों देशों के बयानों से यह संकेत मिल रहा है कि लंबे संघर्ष के बाद शांति का रास्ता खुल सकता है।
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