21 जून को होने वाली NEET (यूजी) 2026 री-एग्जाम से पहले भारत सरकार ने टेलीग्राम पर अस्थायी प्रतिबंध लगा दिया है। यह फैसला परीक्षा की सुरक्षा और पेपर लीक से जुड़ी आशंकाओं को देखते हुए लिया गया है। हालांकि, कई लोगों के मन में सवाल है कि टेलीग्राम को ही क्यों रोका गया, जबकि व्हाट्सऐप और इंस्टाग्राम जैसे अन्य मैसेजिंग प्लेटफॉर्म खुले रहे।
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के अनुसार, टेलीग्राम की कुछ विशेष सुविधाओं का दुरुपयोग कथित पेपर लीक गिरोहों द्वारा किया जा रहा था। टेलीग्राम में चैनल एडमिन पुराने संदेशों को बाद में संपादित कर सकते हैं और उनमें पीडीएफ जैसी फाइलें जोड़ सकते हैं, जबकि मूल संदेश का समय वही बना रहता है। आरोप है कि कुछ मामलों में परीक्षा समाप्त होने के बाद प्रश्नपत्र जोड़कर यह दिखाने की कोशिश की गई कि पेपर पहले ही लीक हो गया था।
इसके अलावा, टेलीग्राम का मल्टी-डिवाइस सपोर्ट और बड़े पैमाने पर सार्वजनिक चैनलों का नेटवर्क भी इसे ऐसे गिरोहों के लिए सुविधाजनक बनाता है। एनटीए के मुताबिक, “पेपर लींक्ड NEET”, “री-NEET 2026”, “प्राइवेट माफिया” और “री NEET माफिया” जैसे नामों से कई चैनल खुलेआम संचालित हो रहे थे। इन चैनलों पर अभ्यर्थियों और उनके परिवारों से कथित तौर पर हजारों से लाखों रुपये लेकर प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने का दावा किया जा रहा था।
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दूसरी ओर, व्हाट्सऐप में टेलीग्राम जैसी सार्वजनिक ब्रॉडकास्टिंग व्यवस्था नहीं है। हालांकि व्हाट्सऐप का उपयोग भी गलत सूचनाएं फैलाने के लिए किया जा सकता है, लेकिन इसकी पहुंच और प्रसार क्षमता टेलीग्राम जैसी नहीं मानी जाती।
इस फैसले पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (FAIMA) ने इसे परीक्षा की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए जरूरी कदम बताया है, जबकि कुछ सोशल मीडिया यूजर्स का कहना है कि समस्या प्लेटफॉर्म नहीं बल्कि व्यवस्था में मौजूद खामियां हैं।
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