नेपाल के गृह मंत्री सुधान गुरुंग ने बुधवार, 22 अप्रैल को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने यह निर्णय अपने वित्तीय मामलों को लेकर उठे सवालों और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए नैतिक जिम्मेदारी के तहत लिया। सुधान गुरुंग ने 26 मार्च 2026 को पदभार संभाला था और महज 26 दिनों के भीतर उन्हें पद छोड़ना पड़ा।
सुधान गुरुंग ने कहा कि उन्होंने हमेशा ईमानदारी से अपने कर्तव्यों का निर्वहन किया, लेकिन हाल ही में उनके शेयर और निवेश को लेकर उठे सवालों को उन्होंने गंभीरता से लिया। उन्होंने कहा, “मेरे लिए किसी भी पद से अधिक महत्वपूर्ण नैतिकता है और जनता का विश्वास सबसे बड़ी शक्ति है।”
उन्होंने 2025 के ‘जेन जेड’ भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन का भी जिक्र किया, जिसमें पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग उठी थी। सुधान गुरुंग ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में शुचिता और जिम्मेदारी आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि देश के इतिहास में बलिदान देने वाले लोगों के प्रति जवाबदेही निभाना जरूरी है।
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सुधान गुरुंग पर उद्योगपति दीपक भट्ट के साथ कथित व्यावसायिक संबंध और माइक्रो-इंश्योरेंस कंपनियों में संदिग्ध निवेश के आरोप लगे थे। जांच एजेंसियों ने उनके कार्यकाल से पहले और दौरान कुछ संदिग्ध वित्तीय लेनदेन की ओर इशारा किया था। इन आरोपों के बाद विरोध प्रदर्शन हुए और उनके इस्तीफे की मांग तेज हो गई।
यह घटनाक्रम प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह की सरकार के लिए एक झटका माना जा रहा है, क्योंकि विपक्ष और नागरिक समाज लगातार जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।
इससे पहले 9 अप्रैल को प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने श्रम, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा मंत्री दीपक कुमार साह को अनुशासनहीनता के आरोप में बर्खास्त कर दिया था। उन पर अपनी पत्नी जूनू श्रेष्ठ को हेल्थ इंश्योरेंस बोर्ड में बनाए रखने के लिए पद का दुरुपयोग करने का आरोप था।
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