अमेरिका (संयुक्त राज्य अमेरिका) और ईरान (ईरान) के बीच तनाव और युद्ध जैसे हालात एक बार फिर तेज हो गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका जल्द ही ईरान पर “बहुत बड़ा हमला” करेगा और चेतावनी दी कि भविष्य में ईरान के तेल और गैस उद्योगों, खासकर अहम खार्ग आइलैंड, पर “पूर्ण नियंत्रण” लिया जा सकता है।
ट्रंप के इस बयान के बाद पश्चिम एशिया में हालात और ज्यादा गंभीर हो गए हैं। इससे पहले भी दोनों देशों के बीच लगातार दूसरे दिन हमले हुए, जिससे पूरा क्षेत्र एक बड़े युद्ध के कगार पर पहुंच गया है। अमेरिका की ओर से किए गए हमले पहले दिन की तुलना में ज्यादा व्यापक और तेज बताए जा रहे हैं।
ईरान ने हमलों के नुकसान के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दी है, लेकिन दावा किया है कि उसने कुवैत, बहरीन और जॉर्डन पर जवाबी मिसाइल हमले किए हैं। इन देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं।
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अमेरिकी सेना (अमेरिकी सेना) ने कहा कि उसने ईरान के बंदरगाहों पर नाकेबंदी लागू करते हुए एक तेल टैंकर को मिसाइल से निष्क्रिय कर दिया, जो ईरानी तेल ले जाने की कोशिश कर रहा था। यह कार्रवाई खाड़ी क्षेत्र में समुद्री व्यापार पर बढ़ते खतरे को दिखाती है।
इससे पहले भी इस हफ्ते कई जहाजों पर हमले हो चुके हैं, जिसमें भारतीय नाविकों की मौत की खबरें भी सामने आई थीं। इससे अंतरराष्ट्रीय शिपिंग सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठे हैं।
अमेरिका का दावा है कि उसकी कार्रवाई ईरान की “आक्रामक गतिविधियों” के जवाब में है, जबकि ईरान का कहना है कि ये हमले अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन हैं और स्थिति को और बिगाड़ रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह टकराव लंबा चला तो वैश्विक तेल आपूर्ति और अर्थव्यवस्था पर भारी असर पड़ेगा। होर्मुज़ जलडमरूमध्य में स्थिति लगातार तनावपूर्ण बनी हुई है और समुद्री मार्ग अब बेहद जोखिम भरा हो गया है।
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