पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ईरान के गहरे भूमिगत सैन्य ठिकानों पर संभावित हमले की तैयारी कर रहा है। रिपोर्टों के अनुसार अमेरिकी वायुसेना अपने लंबी दूरी के रणनीतिक बमवर्षक विमानों—B-1, B-2 और B-52—को इस मिशन के लिए तैयार कर रही है। इन विमानों को ब्रिटेन के सैन्य ठिकानों पर तैनात किया जा रहा है, ताकि जरूरत पड़ने पर ईरान के रणनीतिक लक्ष्यों पर सटीक हमले किए जा सकें।
बताया जा रहा है कि यह सैन्य तैयारी अमेरिका के कथित ऑपरेशन “एपिक फ्यूरी” का हिस्सा है। इस अभियान का उद्देश्य ईरान के उन सैन्य ठिकानों को निशाना बनाना है जो जमीन के काफी नीचे स्थित हैं और सामान्य हथियारों से नष्ट करना मुश्किल होता है। B-1 जैसे बमवर्षक विमानों को “बंकर बस्टर” हथियारों से लैस किया जा सकता है, जो मजबूत और गहरे बंकरों को भी नष्ट करने में सक्षम होते हैं।
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण पहले ही खाड़ी क्षेत्र में तेल आपूर्ति और समुद्री व्यापार प्रभावित हुआ है। विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और जहाजरानी मार्गों पर गंभीर संकट पैदा हो गया है।
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अमेरिका उन देशों में शामिल है जिनके पास लंबी दूरी के रणनीतिक बमवर्षक विमानों का बड़ा बेड़ा है। रूस और चीन भी ऐसे विमानों का संचालन करते हैं। अमेरिकी वायुसेना के B-1, B-2 और B-52 बमवर्षक विमान शीत युद्ध के दौर में विकसित किए गए थे और आज भी अमेरिका की रणनीतिक सैन्य ताकत का अहम हिस्सा माने जाते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन विमानों की तैनाती से क्षेत्र में सैन्य तनाव और बढ़ सकता है और पश्चिम एशिया का संकट और गहरा हो सकता है।
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