अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ अपने कड़े रुख को दोहराते हुए स्पष्ट किया है कि जब तक तेहरान अपना परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह नहीं छोड़ता, तब तक उस पर लगाई गई नौसैनिक नाकाबंदी जारी रहेगी। ट्रंप ने कहा कि यह नाकाबंदी बमबारी से भी अधिक प्रभावी है और इससे ईरान पर भारी आर्थिक दबाव बन रहा है।
एक साक्षात्कार में ट्रंप ने दावा किया कि ईरान अब अमेरिका के साथ समझौता करना चाहता है ताकि नाकाबंदी हट सके। उन्होंने कहा कि ईरान की तेल आपूर्ति और पाइपलाइनों पर गंभीर असर पड़ा है, जिससे उसकी अर्थव्यवस्था संकट में है। ट्रंप ने तीखी भाषा का इस्तेमाल करते हुए कहा कि ईरान “दम घुटने जैसी स्थिति” में है और उसे अंततः झुकना पड़ेगा।
हालांकि, ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि बातचीत जारी है, लेकिन किसी भी समझौते की शर्त यही होगी कि ईरान भविष्य में परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि ईरान “हार मान ले” और अमेरिकी शर्तों को स्वीकार करे।
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दूसरी ओर, ईरान ने अमेरिकी नाकाबंदी को अपनी सरकार को अस्थिर करने की साजिश करार दिया है। ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने चेतावनी दी कि अमेरिका की यह रणनीति असफल होगी और देश में आंतरिक विभाजन पैदा करने का प्रयास सफल नहीं होने दिया जाएगा।
ईरानी ने भी चेतावनी दी है कि इस नाकाबंदी का जवाब “अभूतपूर्व कदमों” से दिया जाएगा। इससे मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ने की आशंका है।
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