ईरान पर अमेरिका-इज़राइल हमलों के बाद भारत में संभावित असर को देखते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय (एमएचए) ने राज्यों को सतर्क रहने का निर्देश दिया है। 28 फरवरी को जारी परिपत्र में राज्यों और सुरक्षा एजेंसियों से कहा गया है कि वे “प्रो-ईरान कट्टर उपदेशकों” की पहचान करें, जो भड़काऊ भाषण देकर अशांति या सांप्रदायिक तनाव पैदा कर सकते हैं।
गृह मंत्रालय ने आगाह किया कि पश्चिम एशिया में चल रहे घटनाक्रम के घरेलू स्तर पर “रिपल इफेक्ट” हो सकते हैं, खासकर धार्मिक सभाओं में भड़काऊ बयानबाजी के जरिए। मंत्रालय ने खुफिया तंत्र को मजबूत करने और एहतियाती कदम उठाने पर जोर दिया है ताकि कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने से रोका जा सके।
इस बीच, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को लेकर भारत सरकार उच्चस्तरीय निगरानी कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से फोन पर बातचीत कर क्षेत्रीय हालात पर चर्चा की और जल्द से जल्द संघर्षविराम की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया।
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प्रधानमंत्री मोदी ने कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (सीसीएस) की बैठक भी की, जिसमें 28 फरवरी को ईरान पर हुए हवाई हमलों और उसके बाद खाड़ी देशों में बढ़ते तनाव की समीक्षा की गई। बैठक में खाड़ी क्षेत्र में रह रहे बड़ी संख्या में भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा पर गंभीर चिंता जताई गई।
CCS ने संबंधित विभागों को निर्देश दिया कि प्रभावित भारतीय नागरिकों की हरसंभव सहायता सुनिश्चित की जाए। साथ ही संवाद और कूटनीति के जरिए जल्द समाधान निकालने की आवश्यकता दोहराई गई।
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