विश्लेषकों के अनुसार, पाकिस्तान एक बार फिर अतीत की एक सैन्य घटना को लेकर अपनी मनचाही कहानी गढ़ने की कोशिश में जुट गया है। इस प्रयास के तहत सोशल मीडिया पर भ्रामक और अप्रमाणित सैटेलाइट तस्वीरें साझा की जा रही हैं, जिनमें झूठा दावा किया जा रहा है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सैन्य ठिकानों पर हमले किए गए थे। ये पोस्ट संघर्ष के कई महीने बाद दोबारा सामने आई है और इनमें पंजाब के अमृतसर सहित भारत के उत्तरी क्षेत्रों में स्थित सैन्य प्रतिष्ठानों को नुकसान पहुंचाने का दावा किया गया है।
हालांकि, इन दावों के समर्थन में कोई ठोस तथ्य मौजूद नहीं हैं। स्वतंत्र जांच में सामने आया है कि जिन स्थानों की तस्वीरें दिखाई जा रही हैं, वहां किसी भी तरह के विनाश या क्षति के संकेत नहीं मिलते। कथित रूप से निशाना बनाए गए भारतीय सैन्य ठिकाने पूरी तरह सुरक्षित और यथावत हैं। विश्लेषकों का कहना है कि तस्वीरों में विस्फोट के गड्ढे, मलबा, झुलसे हुए निशान या ढही हुई संरचनाएं जैसे कोई भी संकेत मौजूद नहीं हैं, जो किसी हवाई या मिसाइल हमले के बाद सामान्यतः दिखाई देते हैं।
इस नए दुष्प्रचार अभियान का समय भी सवाल खड़े करता है। मई में हुई वास्तविक झड़पों के दौरान पाकिस्तान अपने दावों के समर्थन में कोई विश्वसनीय सैटेलाइट इमेजरी या स्वतंत्र रूप से सत्यापित सबूत पेश करने में विफल रहा था। अब सात महीने बाद बिना किसी प्रमाणिक समय-चिह्न, सैटेलाइट स्रोत विवरण या निष्पक्ष पुष्टि के इन तस्वीरों का सामने आना इस बात की ओर इशारा करता है कि यह साक्ष्य गढ़ने की बाद की कोशिश है।
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यह पहली बार नहीं है जब इस संघर्ष को लेकर अतिरंजित और निराधार दावे सामने आए हों। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान और उसके तुरंत बाद भी पाकिस्तानी सोशल मीडिया पर काल्पनिक “विजय अनुपात” और भारत के रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाने जैसे दावे किए गए थे, जिन्हें कभी भी स्वतंत्र स्रोतों से पुष्टि नहीं मिली।
ओपन-सोर्स इंटेलिजेंस विशेषज्ञों ने इन नई तस्वीरों में कई खामियां बताई हैं। तुलनात्मक चित्रों से साफ है कि संबंधित स्थानों में पहले और बाद में कोई बदलाव नहीं हुआ। इसके बावजूद पाकिस्तान आधारित सोशल मीडिया हैंडल्स इन भ्रामक तस्वीरों को लगातार प्रचारित कर रहे हैं, जिससे यह एक सोची-समझी दुष्प्रचार मुहिम प्रतीत होती है।
भारत ने स्पष्ट किया है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान किसी भी पाकिस्तानी हमले से उसके सैन्य ढांचे को नुकसान नहीं पहुंचा। पंजाब, खासकर अमृतसर के आसपास स्थित सैन्य ठिकानों की पूरी तरह सुरक्षित स्थिति इस दावे की पुष्टि करती है। स्वतंत्र विश्लेषकों की राय भी यही है कि पाकिस्तानी दावों का कोई विश्वसनीय आधार नहीं है।
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