अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुई वार्ता के विफल होने के बाद अब पाकिस्तान ने एक बार फिर कूटनीतिक पहल तेज कर दी है। रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान दोनों देशों के बीच दूसरे दौर की बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहा है और इस प्रक्रिया को इस्लामाबाद में आयोजित करने का प्रयास किया जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, भले ही अभी तक कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन दोनों पक्ष अनौपचारिक रूप से बातचीत जारी रखने के लिए तैयार बताए जा रहे हैं। यह वार्ता या तो इस्लामाबाद में या फिर किसी तटस्थ स्थान जैसे जिनेवा में आयोजित की जा सकती है। अगले दो दिनों के भीतर बैठक आयोजित करने की कोशिशें तेज हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस विवाद का जल्द समाधान चाहते हैं, ताकि आगामी अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों और मई में चीन यात्रा से पहले कूटनीतिक बढ़त हासिल की जा सके।
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ईरान की राजधानी तेहरान में नेतृत्व बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए तैयार तो है, लेकिन कुछ शर्तों के साथ। ईरानी अधिकारी किसी भी समझौते को घरेलू स्तर पर “रणनीतिक सफलता” के रूप में प्रस्तुत करने की गारंटी चाहते हैं।
इससे पहले ट्रंप प्रशासन की कोशिशें विफल हो गई थीं, क्योंकि दोनों पक्ष एक-दूसरे की शर्तों पर सहमत नहीं हो सके थे। इसके बाद अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों पर नौसैनिक नाकेबंदी की घोषणा की थी।
होर्मुज जलडमरूमध्य, जो फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी को जोड़ता है, वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत मार्ग है। तनाव के कारण यहां पहले से ही जहाजों की आवाजाही प्रभावित है। विशेषज्ञों का मानना है कि नाकेबंदी से स्थिति में सुधार की संभावना कम है और बातचीत ही एकमात्र समाधान है।
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस ने कहा कि वार्ता में ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर सहमति नहीं बन पाई, जिससे बातचीत टूट गई। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका किसी भी स्थिति में ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा।
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